कविता · 1100 · Nishapur

रुबाइयात

رباعیات

प्रस्तावना

उमर ख़य्याम (१०४८–११३१) निशापुर के गणितज्ञ, खगोलशास्त्री और दार्शनिक थे — अपने युग में एक बीजगणितज्ञ और पंचांग-सुधारक के रूप में विख्यात, न कि कवि के रूप में। रुबाई — चार मिसरों की वह कविता जो पहली दो पंक्तियों में दृश्य या तर्क रखती है, तीसरी में मुड़ती है, और चौथी में सूत्र-सी चोट के साथ उतरती है — उनके नाम से सदियों तक इकट्ठा होती रही, अक्सर अनिश्चित श्रेय के साथ। यह संस्करण फ़ोरूग़ी–ग़नी (तेहरान, १९४२) के १७८ रुबाइयों का है, जो फ़ारसी मूल से सीधा अनूदित है।

एडवर्ड फ़िट्ज़जेरल्ड का प्रसिद्ध अंग्रेज़ी ’रुबाइयात’ (१८५९) एक विक्टोरियन पुनर्रचना है, अनुवाद नहीं — उसने कई अलग रुबाइयों को एक सतत कविता में ढाला और अपनी तुकबन्दी व कल्पनाएँ जोड़ीं। यहाँ का प्रयास उलटा है: हर रुबाई को फ़ारसी में जो कहती है, वैसा ही, मिसरा-दर-मिसरा देना — बिना विलय, बिना भराव, बिना उस मशहूर तुक की नक़ल के। जहाँ फ़िट्ज़जेरल्ड की पंक्तियाँ मुहावरे बन गईं, वहाँ मूल फ़ारसी का अर्थ ही दिया गया है।

ख़य्याम की आवाज़ एक ज्यामितिज्ञ की-सी है जो मृत्यु पर बात कर रहा हो: ठोस संज्ञाएँ (कूज़ा, मिट्टी, लाला, मयख़ाना, सराय), सादा वाक्य-रचना, और तार्किक जोड़ (चूँकि, इससे पहले कि, अगर) एक शान्त पर विदारक तर्क को आगे बढ़ाते हैं। स्वर शुष्क, सन्देहशील, कोमल है — कभी रहस्यवादी धुंध नहीं, कभी विलापी नहीं। बार-बार लौटने वाले चित्र हैं: घूमता आसमान (चरख़, फ़लक) नियति के रूप में; धूल-से-मिट्टी-से-घड़े-से-धूल का चक्र, जिसमें बादशाहों की मिट्टी से कूज़े बनते हैं; और एक ही टेक — प्रसन्न रह, इस साँस को पी लो, क्योंकि कल की ज़मानत कोई नहीं देता।

पाठक को यह भी देखना चाहिए कि क़ुरआन, बहिश्त की हूरों, बहत्तर मिल्लतों, मस्जिद और मन्दिर को छूती रुबाइयों में जो बेबाकी है, वह मूल की है — उसे नरम करना बेवफ़ाई होगी, और उसमें कुछ जोड़ना भी। यहाँ बुद्धि तीखी है, पर चीख़ती नहीं। कई रुबाइयाँ अन्य कवियों के नाम से भी मिलती हैं; यह सन्देह अनुवाद के शरीर में नहीं, अपितु उपकरण-सामग्री में दर्ज है।

उठ, ऐ सनम, आ, हमारे दिल की ख़ातिर,
अपने ही रूप से हमारी मुश्किल हल कर;
एक कूज़ा शराब, कि हम साथ पी लें,
इससे पहले कि हमारी मिट्टी से कूज़े बनें।
برخیز بتا بیا ز بهر دل ما
حل کن به جمال خویشتن مشکل ما
یک کوزه شراب تا به هم نوش کنیم
زآن پیش که کوزه‌ها کنند از گل ما
चूँकि कोई कल की ज़मानत नहीं देता,
इस उदास दिल को अभी प्रसन्न रख;
चाँदनी में शराब पी, ऐ चाँद, क्योंकि चाँद
बहुत चमकेगा और हमें न पाएगा।
چون عهده نمی‌شود کسی فردا را
حالی خوش دار این دل پرسودا را
می نوش به ماهتاب ای ماه که ماه
بسیار بتابد و نیابد ما را
क़ुरआन, जिसे परम वचन कहते हैं,
उसे कभी-कभी पढ़ते हैं, हमेशा नहीं;
पर प्याले की गोलाई पर एक आयत स्थायी बसी है,
जिसे हर जगह सदा पढ़ते हैं।
قرآن که مهین کلام خوانند آن را
گهگاه نه بر دوام خوانند آن را
بر گرد پیاله آیتی هست مقیم
کاندر همه جا مدام خوانند آن را
अगर तू शराब नहीं पीता तो मतवालों को ताना न दे,
छल और धोखे की बुनियाद न रख;
तू इस पर घमंड न कर कि तू शराब नहीं पीता,
सौ ऐसे कौर खाता है जिनका शराब ग़ुलाम है।
گر می نخوری طعنه مزن مستان را
بنیاد مکن تو حیله و دستان را
تو غره بدان مشو که می می‌نخوری
صد لقمه خوری که می غلام است آن را
भले ही रंग और ख़ुशबू मुझमें सुन्दर है,
लाले-सा चेहरा और सर्व-सा क़द मुझमें है,
यह न जाना कि इस मिट्टी के आनन्दगृह में
अनादि के चित्रकार ने किसलिए मुझे सजाया।
هر چند که رنگ و بوی زیباست مرا
چون لاله رخ و چو سرو بالاست مرا
معلوم نشد که در طربخانۀ خاک
نقاش ازل بهر چه آراست مرا
हम हैं और शराब और साज़ और यह उजड़ा कोना,
जान और दिल और जाम और शराब से भीगे वस्त्र;
न रहमत की आस, न अज़ाब का डर,
मिट्टी, हवा, आग और पानी से आज़ाद।
ماییم و می و مطرب و این کنج خراب
جان و دل و جام و جامه پر درد شراب
فارغ ز امید رحمت و بیم عذاب
آزاد ز خاک و باد و از آتش و آب
वह महल जिसमें जमशेद ने जाम उठाया,
हिरन ने वहाँ बच्चा दिया और लोमड़ी ने विश्राम पाया;
बहराम, जो उम्र भर गोरख़र पकड़ता रहा,
देखा तूने कि किस तरह गोर ने बहराम को पकड़ा।
آن قصر که جمشید در او جام گرفت
آهو بچه کرد و روبه آرام گرفت
بهرام که گور می‌گرفتی همه عمر
دیدی که چگونه گور بهرام گرفت
बादल आया और फिर हरियाली पर रोया,
गुलाबी शराब के बिना जीना नहीं चाहिए;
यह हरियाली जो आज हमारा तमाशागाह है,
जब हमारी मिट्टी की हरियाली होगी, वह किसका तमाशागाह होगी।
ابر آمد و باز بر سر سبزه گریست
بی بادهٔ گلرنگ نمی‌باید زیست
این سبزه که امروز تماشاگه ماست
تا سبزهٔ خاک ما تماشاگه کیست
अब जबकि तेरी ख़ुशनसीबी का फूल भरा-पूरा है,
तेरा हाथ शराब के जाम से क्यों ख़ाली है;
शराब पी, कि ज़माना दग़ाबाज़ दुश्मन है,
ऐसा दिन फिर पाना दुश्वार है।
اکنون که گل سعادتت پربار است
دست تو ز جام می چرا بیکار است
می خور که زمانه دشمنی غدار است
دریافتن روز چنین دشوار است
आज तेरे बस में कल नहीं है,
और कल की चिन्ता सिवा वहम के कुछ नहीं;
इस दम को बरबाद न कर अगर तेरा दिल पागल नहीं,
कि इस बची उम्र का कोई मोल नहीं दिखता।
امروز تو را دسترس فردا نیست
واندیشهٔ فردات به جز سودا نیست
ضایع مکن این دم ار دلت شیدا نیست
کاین باقی عمر را بها پیدا نیست
ऐ आत्मलोक से तेज़ी से आए हुए,
पाँच और चार और छह और सात में हैरान हुए,
शराब पी, तू नहीं जानता कहाँ से आया है,
प्रसन्न रह, तू नहीं जानता कहाँ जाएगा।
ای آمده از عالم روحانی تفت
حیران شده در پنج و چهار و شش و هفت
می نوش ندانی ز کجا آمده‌ای
خوش باش ندانی به کجا خواهی رفت
ऐ आसमान की चरख़, तेरी कीने से यह उजाड़ है,
अन्याय तेरी पुरानी रीत है;
ऐ मिट्टी, अगर तेरा सीना चीर दें,
कितने ही बेशक़ीमती जौहर तेरे सीने में हैं।
ای چرخ فلک خرابی از کینهٔ توست
بیدادگری شیوهٔ دیرینهٔ توست
ای خاک اگر سینه تو بشکافند
بس گوهر قیمتی که در سینهٔ توست
ऐ दिल, चूँकि ज़माना तुझे ग़मगीन करता है,
अचानक तेरी पाक जान तन से निकल जाएगी;
हरियाली पर बैठ और कुछ दिन ख़ुश जी,
इससे पहले कि तेरी मिट्टी से हरियाली उगे।
ای دل چو زمانه می‌کند غمناکت
ناگه برود ز تن روان پاکت
بر سبزه نشین و خوش بزی روزی چند
زآن پیش که سبزه بر دمد از خاکت
अस्तित्व का यह समुद्र छिपाव से बाहर आया,
कोई नहीं जिसने सत्य के इस मोती को बेधा हो;
हर किसी ने अपने वहम से कुछ कहा,
जो असल में है, उसे कोई कह नहीं सका।
این بحر وجود آمده بیرون ز نهفت
کس نیست که این گوهر تحقیق بسفت
هر کس سخنی از سر سودا گفتند
زآن روی که هست کس نمی‌داند گفت
यह कूज़ा मेरी तरह कोई रोता आशिक़ था,
किसी सुन्दरी की ज़ुल्फ़ की क़ैद में था;
यह दस्ता जो तू उसकी गर्दन पर देखता है,
वह हाथ है जो किसी यार की गर्दन पर था।
این کوزه چو من عاشق زاری بوده‌ست
در بند سر زلف نگاری بوده‌ست
این دسته که بر گردن او می‌بینی
دستی‌ست که بر گردن یاری بوده‌ست
यह कूज़ा किसी मज़दूर का पानी-पात्र है,
किसी शाह की आँख और वज़ीर के दिल से बना;
हर शराब का कटोरा जो किसी मतवाले की हथेली पर है,
किसी मस्त के गाल और किसी छिपी हुई की होंठ से है।
این کوزه که آبخوارهٔ مزدوری‌ست
از دیدهٔ شاهی و دل دستوری‌ست
هر کاسهٔ می که بر کف مخموری‌ست
از عارض مستی و لب مستوری‌ست
यह पुराना सराय जिसका नाम संसार है,
और जो सुबह-शाम की अलबेली रंगत का विश्रामगृह है,
यह एक बज़्म है जो सौ जमशेदों की बची हुई है,
यह एक महल है जो सौ बहरामों का तकिया है।
این کهنه رباط را که عالم نام است
وآرامگه ابلق صبح و شام است
بزمی‌ست که واماندۀ صد جمشید است
قصری‌ست که تکیه‌گاه صد بهرام است
यह एक-दो-तीन दिन की उम्र की बारी गुज़र गई,
जैसे नदी में पानी और मैदान में हवा;
मुझे कभी दो दिनों का ग़म याद नहीं आया —
वह दिन जो नहीं आया और वह दिन जो गुज़र गया।
این یک دو سه روز نوبت عمر گذشت
چون آب به جویبار و چون باد به دشت
هرگز غم دو روز مرا یاد نگشت
روزی که نیامده‌ست و روزی که گذشت
फूल के चेहरे पर नौरोज़ की बयार भली है,
चमन के आँगन में दिलकश चेहरा भला है;
बीते कल का जो कुछ कहे भला नहीं,
प्रसन्न रह और कल की बात न कर, कि आज भला है।
بر چهرۀ گل نسیم نوروز خوش است
در صحن چمن روی دل‌افروز خوش است
از دی که گذشت هر چه گویی خوش نیست
خوش باش و ز دی مگو که امروز خوش است
मुझसे और तुझसे पहले भी रात-दिन थे,
घूमता आसमान भी काम पर था;
जहाँ कहीं तू ज़मीन पर क़दम रखे,
वह किसी सुन्दरी की आँख की पुतली थी।
پیش از من و تو لیل و نهاری بوده‌ست
گردنده فلک نیز بکاری بوده است
هرجا که قدم نهی تو بر روی زمین
آن مردمک چشم نگاری بوده‌ست
कब तक मैं समुद्रों के मुँह पर ईंट फेंकूँ,
मैं मन्दिर के बुतपरस्तों से बेज़ार हो गया;
ख़य्याम, किसने कहा कि दोज़ख़ी होगा,
कौन दोज़ख़ गया और कौन बहिश्त से आया।
تا چند زنم به روی دریاها خشت
بیزار شدم ز بت‌پرستان کنشت
خیام ، که گفت دوزخی خواهد بود
که رفت به دوزخ و که آمد ز بهشت
प्याले का मेल जो आपस में जुड़ा,
उसे तोड़ना कोई मतवाला रवा नहीं समझता;
इतने नाज़ुक सिर और पैर, सिर और हाथ —
किसकी मुहब्बत से जुड़े और किसके कीने से टूटे।
ترکیب پیاله‌ای که در هم پیوست
بشکستن آن روا نمی‌دارد مست
چندین سر و پای نازنین از سر و دست
از مهر که پیوست و به کین که شکست
तत्वों का मेल जब तेरे मन-भर एक दम है,
जा, ख़ुश जी, भले ही तुझ पर ज़ुल्म है;
अक़्लमंदों के साथ रह, कि तेरे तन की जड़
थोड़ी धूल, बयार, ग़ुबार और एक साँस है।
ترکیب طبایع چو به کام تو دمی‌ست
رو شاد بزی اگرچه بر تو ستمی‌ست
با اهل خرد باش که اصل تن تو
گردی و نسیمی و غباری و دمی‌ست
जब बादल ने नौरोज़ में लाले का चेहरा धोया,
उठ और जाम-ए-शराब से पक्का इरादा कर,
कि यह हरियाली जो आज तेरा तमाशागाह है,
कल सारी तेरी मिट्टी से ही उगेगी।
چون ابر به نوروز رخ لاله بشست
برخیز و به جام باده کن عزم درست
کاین سبزه که امروز تماشاگه توست
فردا همه از خاک تو برخواهد رست
जब मतवाले बुलबुल ने बाग़ की राह पाई,
फूल का चेहरा और शराब का जाम हँसते पाए,
हाल की ज़बान में मेरे कान में आकर बोला:
समझ ले, बीती उम्र फिर नहीं पाई जाती।
چون بلبل مست راه در بستان یافت
روی گل و جام باده را خندان یافت
آمد به زبان حال در گوشم گفت
دریاب که عمر رفته را نتوان یافت
चूँकि चरख़ कभी किसी अक़्लमंद के मन-भर न घूमा,
तू आसमान को सात गिन या आठ;
जब मरना है और सारी आरज़ुएँ छोड़नी हैं,
चींटी क़ब्र में खाए या भेड़िया मैदान में — क्या फ़र्क़।
چون چرخ به کام یک خردمند نگشت
خواهی تو فلک هفت شمر خواهی هشت
چون باید مرد و آرزوها همه هشت
چه مور خورد به گور و چه گرگ به دشت
लाले की तरह नौरोज़ में क़दह हाथ में ले,
किसी लालेरुख़ के साथ अगर तुझे फ़ुरसत है;
आनन्द से शराब पी, कि यह पुराना चरख़
अचानक तुझे मिट्टी-सा नीचा कर देगा।
چون لاله به نوروز قدح گیر به دست
با لاله‌رخی اگر تو را فرصت هست
می نوش به خرمی که این چرخ کهن
ناگاه تو را چو خاک گرداند پست
चूँकि सच्चाई और यक़ीन हाथ में नहीं,
शक की उम्मीद पर सारी उम्र बैठा नहीं जा सकता;
सावधान, कि शराब का जाम हथेली से न रखें,
बेख़बरी में आदमी क्या होश में क्या मस्त।
چون نیست حقیقت و یقین اندر دست
نتوان به امید شک همه عمر نشست
هان تا ننهیم جام می از کف دست
در بی‌خبری مرد چه هشیار و چه مست
चूँकि जो कुछ है, उसमें से हवा के सिवा हाथ कुछ नहीं,
चूँकि जो कुछ है, उस हर चीज़ में कमी और टूट है;
मान ले कि जो कुछ जग में है वह नहीं है,
समझ ले कि जो कुछ जग में नहीं वह है।
چون نیست ز هرچه هست جز باد به دست
چون هست به هرچه هست نقصان و شکست
انگار که هرچه هست در عالم نیست
پندار که هرچه نیست در عالم هست
वह मिट्टी जो किसी नादान के पाँव तले है,
किसी सनम की हथेली और किसी प्रिया का चेहरा है;
हर ईंट जो किसी ऐवान के कँगूरे पर है,
किसी वज़ीर की उँगली या किसी सुलतान का सिर है।
خاکی که به زیر پای هر نادانی‌ست
کفّ صنمیّ و چهرهٔ جانانی‌ست
هر خشت که بر کنگرهٔ ایوانی‌ست
انگشت وزیر یا سر سلطانی‌ست
जब स्वामी ने तत्वों का मेल सजाया,
तो किसलिए उसे कमी और घटी में डाला;
अगर अच्छा बना तो तोड़ना किसलिए,
और अगर अच्छा न बना तो इन रूपों का दोष किसका।
دارنده چو ترکیب طبایع آراست
از بهر چه اوفکندش اندر کم و کاست
گر نیک آمد شکستن از بهر چه بود
ور نیک نیامد این صور عیب که راست
रहस्यों के परदे में किसी को राह नहीं,
इस बनावट से किसी की जान वाक़िफ़ नहीं;
मिट्टी के दिल के सिवा कोई मंज़िल नहीं,
शराब पी, कि ऐसी कहानियाँ छोटी नहीं।
در پردۀ اسرار کسی را ره نیست
زین تعبیه جان هیچ‌کس آگه نیست
جز در دل خاک هیچ منزلگه نیست
می خور که چنین فسانه‌ها کوته نیست
मैं नींद में था, किसी अक़्लमंद ने मुझसे कहा:
नींद से किसी का ख़ुशी का फूल नहीं खिला;
ऐसा काम क्या करता है जो मौत का जोड़ है?
शराब पी, कि मिट्टी के नीचे सोना ही है।
در خواب بدم مرا خردمندی گفت
کز خواب کسی را گل شادی نشکفت
کاری چه کنی که با اجل باشد جفت؟
می خور که به زیر خاک می‌باید خفت
इस दायरे में जो हमारा आना-जाना है,
न उसका आदि, न उसका अन्त दिखता है;
कोई इस बात में एक दम भी सच नहीं कहता,
कि यह आना कहाँ से और जाना कहाँ है।
در دایره‌ای که آمد و رفتن ماست
او را نه بدایت نه نهایت پیداست
کس می‌نزند دمی در این معنی راست
کاین آمدن از کجا و رفتن به کجاست
बहार की ऋतु में अगर कोई हूर-सी सुन्दरी
खेत के किनारे एक साग़र शराब मुझे दे,
भले ही आम लोगों के नज़दीक यह बुरा हो,
मैं कुत्ते से बदतर हूँ अगर बहिश्त का नाम लूँ।
در فصل بهار اگر بتی حور سرشت
یک ساغر می دهد مرا بر لب کشت
هر چند به نزد عامه این باشد زشت
سگ به ز من است اگر برم نام بهشت
समझ ले कि तू रूह से जुदा हो जाएगा,
फ़ना के रहस्यों के परदे में चला जाएगा;
शराब पी, तू नहीं जानता कहाँ से आया है,
प्रसन्न रह, तू नहीं जानता कहाँ जाएगा।
دریاب که از روح جدا خواهی رفت
در پردۀ اسرار فنا خواهی رفت
می نوش ندانی از کجا آمده‌ای
خوش باش ندانی به کجا خواهی رفت
साक़ी, फूल और हरियाली ख़ूब उमंग में है,
समझ ले कि हफ़्ते भर में मिट्टी हो जाएगी;
शराब पी और एक फूल चुन ले, कि जब तू देखे,
फूल मिट्टी हो गया और हरियाली कूड़ा।
ساقی گل و سبزه بس طربناک شده‌ست
دریاب که هفته دگر خاک شده‌ست
می نوش و گلی بچین که تا درنگری
گل خاک شده‌ست و سبزه خاشاک شده‌ست
मेरी एक उम्र अँधेरी है और काम सीधा नहीं,
दुख सब बढ़े हुए और राहत घटी हुई;
ईश्वर का शुक्र, कि जो कुछ बला के सामान हैं,
हमें किसी और से माँगना नहीं पड़ता।
عمری‌ست مرا تیره و کاری‌ست نه راست
محنت همه افزوده و راحت کم و کاست
شکر ایزد را که آنچه اسباب بلاست
ما را ز کس دگر نمی‌باید خواست
फूलों की ऋतु, नदी का किनारा और खेत की मेड़,
एक-दो-तीन साथियों और किसी हूर-सी गुड़िया के संग;
क़दह आगे रख, कि सुबह की शराब पीने वाले
मस्जिद से बेफ़िक्र हैं और मन्दिर से आज़ाद।
فصل گل و طرف جویبار و لب کشت
با یک دو سه اهل و لعبتی حورسرشت
پیش آر قدح که باده‌نوشان صبوح
آسوده ز مسجدند و فارغ ز کنشت
अगर बक़ा की शाख़ तेरी क़िस्मत की जड़ से उगी हो,
और अगर तेरे तन पर उम्र चुस्त वस्त्र हो,
इस तन के ख़ेमे में जो तेरी छतरी है,
सावधान, टेक न लगा, कि उसकी चार कीलें ढीली हैं।
گر شاخ بقا ز بیخ بختت رستست
ور بر تن تو عمر لباسی چستست
در خیمه تن که سایبانی‌ست ترا
هان تکیه مکن که چارمیخش سستست
लोग कहते हैं कि बहिश्त हूर के साथ भला है,
मैं कहता हूँ कि अंगूर का पानी भला है;
यह नक़द ले और उस उधार से हाथ खींच,
कि ढोल की आवाज़ दूर से सुनना भला है।
گویند کسان بهشت با حور خوش است
من می‌گویم که آب انگور خوش است
این نقد بگیر و دست از آن نسیه بدار
کآواز دهل شنیدن از دور خوش است
मुझसे कहते हैं कि मतवाला दोज़ख़ी होगा,
यह बात झूठी है, दिल उस पर न लगाया जाए;
अगर आशिक़ और शराबी दोज़ख़ में होंगे,
तो कल बहिश्त हथेली-सी ख़ाली देखेगा।
گویند مرا که دوزخی باشد مست
قولی‌ست خلاف ، دل در آن نتوان بست
گر عاشق و میخواره به دوزخ باشند
فردا بینی بهشت همچون کف دست
मैं कुछ नहीं जानता कि जिसने मुझे गढ़ा,
उसने मुझे बहिश्ती बनाया या भद्दा दोज़ख़ी;
एक जाम, एक सनम और एक बरबत खेत के किनारे —
ये तीनों मुझे नक़द, और तुझे बहिश्त उधार।
من هیچ ندانم که مرا آن‌که سرشت
از اهل بهشت کرد یا دوزخ زشت
جامی و بتی و بربطی بر لب کشت
این هرسه مرا نقد و تو را نسیه بهشت
चाँदनी ने अपने नूर से रात का दामन चीरा,
शराब पी, इससे बेहतर एक दम नहीं मिलता;
प्रसन्न रह और सोच मत, कि चाँदनी बहुत बार
हमारी मिट्टी के सिर पर एक-एक कर चमकेगी।
مهتاب به نور دامن شب بشکافت
می نوش دمی بهتر از این نتوان یافت
خوش باش و میندیش که مهتاب بسی
اندر سر خاک یک به یک خواهد تافت
शराब पीना और ख़ुश रहना मेरा धरम है,
कुफ़्र और दीन से बेफ़िक्र रहना मेरा दीन है;
मैंने ज़माने की दुल्हन से पूछा तेरा महर क्या है,
उसने कहा तेरा प्रसन्न दिल मेरा महर है।
می خوردن و شاد بودن آیین من است
فارغ بودن ز کفر و دین دین من است
گفتم به عروس دهر کابین تو چیست
گفتا دل خرم تو کابین من است
शराब पिघला हुआ लाल है और सुराही खान है,
प्याला जिस्म है और उसकी शराब जान है;
वह बिल्लौरी जाम जो शराब से हँसता है,
एक आँसू है जिसमें दिल का ख़ून छिपा है।
می لعل مذاب است و صراحی کان است
جسم است پیاله و شرابش جان است
آن جام بلورین که ز می خندان است
اشکی است که خون دل در او پنهان است
शराब पी, कि सदा की उम्र यही है,
जवानी के दौर से तेरा हासिल यही है;
फूल, शराब और मतवाले दोस्तों का वक़्त —
एक दम प्रसन्न रह, कि ज़िन्दगी यही है।
می نوش که عمر جاودانی این است
خود حاصلت از دور جوانی این است
هنگام گل و باده و یاران سرمست
خوش باش دمی که زندگانی این است
भला और बुरा जो इनसान के स्वभाव में है,
ख़ुशी और ग़म जो क़ज़ा और क़दर में है,
इसे चरख़ पर मत टाल, कि अक़्ल की राह में
चरख़ तुझसे हज़ार गुना बेचारा है।
نیکی و بدی که در نهاد بشر است
شادی و غمی که در قضا و قدر است
با چرخ مکن حواله کاندر ره عقل
چرخ از تو هزار بار بیچاره‌تر است
हर उस मैदान में जो लाले का बाग़ था,
किसी शहरयार के ख़ून की लाली से था;
बैंगनी की हर शाख़ जो ज़मीन से उगती है,
वह तिल है जो किसी सुन्दरी के गाल पर था।
در هر دشتی که لاله‌زاری بوده‌ست
از سرخی خون شهریاری بوده‌ست
هر شاخ بنفشه کز زمین می‌روید
خالی‌ست که بر رخ نگاری بوده‌ست
हर ज़र्रा जो किसी ज़मीन की मिट्टी में था,
मुझसे और तुझसे पहले कोई ताज और नगीना था;
किसी नाज़ुक चेहरे की धूल आदर से झाड़,
कि वह भी किसी सुन्दर नाज़ुक का चेहरा था।
هر ذره که در خاک زمینی بوده‌ست
پیش از من و تو تاج و نگینی بوده‌ست
گرد از رخ نازنین به آزرم فشان
کآن هم رخ خوب نازنینی بوده‌ست
हर हरियाली जो किसी नदी के किनारे उगी है,
मानो किसी फ़रिश्ता-स्वभाव के होंठ से उगी है;
हरियाली पर पाँव हिक़ारत से न रख,
कि वह हरियाली किसी लालेरुख़ की मिट्टी से उगी है।
هر سبزه که بر کنار جویی رسته‌ست
گویی ز لب فرشته‌خویی رسته‌ست
پا بر سر سبزه تا به خواری ننهی
کآن سبزه ز خاک لاله‌رویی رسته‌ست
शराब की एक घूँट कावूस के राज्य से भली है,
क़ुबाद के तख़्त और तूस की बादशाहत से भली है;
हर वह आह जो कोई रिन्द सहर के वक़्त भरे,
ढोंगी ज़ाहिदों की इबादत से भली है।
یک جرعهٔ می ز ملک کاووس به است
از تخت قباد و ملکت طوس به است
هر ناله که رندی به سحرگاه زند
از طاعت زاهدان سالوس به است
जब उम्र ख़त्म हो, क्या मीठी क्या कड़वी,
जब पैमाना भर जाए, क्या बग़दाद क्या बल्ख़;
शराब पी, कि मुझसे और तुझसे बाद बहुत चाँद
महीने के अन्त से आरम्भ को और आरम्भ से अन्त को आएँगे।
چون عمر به سر رسد چه شیرین و چه تلخ
پیمانه چو پر شود چه بغداد و چه بلخ
می نوش که بعد از من و تو ماه بسی
از سَلخ به غٌرّه آید از غره به سلخ
वे जो ज्ञान और शिष्टता के समुद्र बने,
अपने कमाल में साथियों की महफ़िल के दीपक बने,
इस अँधेरी रात से बाहर राह न पाई,
एक कहानी कही और नींद में चले गए।
آنان که محیط فضل و آداب شدند
در جمع کمال شمع اصحاب شدند
ره زین شب تاریک نبردند برون
گفتند فسانه‌ای و در خواب شدند
जिन्हें कारणों के मैदान की ओर हाँका गया,
उनके बिना सारे काम निपटा दिए गए;
आज एक बहाना गढ़ दिया,
कल वही होगा जो पहले से रच रखा था।
آن را که به صحرای علل تاخته‌اند
بی او همه کارها بپرداخته‌اند
امروز بهانه‌ای درانداخته‌اند
فردا همه آن بود که درساخته‌اند
वे जो पुराने हुए और ये जो नए हैं,
हर कोई अपनी मुराद की ओर एक दौड़ दौड़ता है;
यह पुराना जग किसी के लिए बाक़ी नहीं रहता,
वे गए और हम जाएँगे, और आएँगे और जाएँगे।
آن‌ها که کهن شدند و این‌ها که نوند
هر کس به مراد خویش یک تک به دوند
این کهنه‌جهان به کس نماند باقی
رفتند و رویم دیگر آیند و روند
जिसने ज़मीन और चरख़ और आसमान रचे,
कितने ही दाग़ उसने ग़मगीन दिल पर रखे;
लाल-सी बहुत होंठ और कस्तूरी-सी ज़ुल्फ़ें
उसने ज़मीन के ढोल और मिट्टी की डिबिया में रख दीं।
آن‌کس که زمین و چرخ و افلاک نهاد
بس داغ که او بر دل غمناک نهاد
بسیار لب چو لعل و زلفین چو مشک
در طبل زمین و حقهٔ خاک نهاد
एक को लाते हैं और दूसरे को उठा ले जाते हैं,
किसी पर भी राज़ नहीं खोलते;
हमें क़ज़ा इससे ज़्यादा नहीं दिखाती,
यह हमारी उम्र का पैमाना है, जिसे नाप रहे हैं।
آرند یکی و دیگری بربایند
بر هیچ‌کسی راز همی‌نگشایند
ما را ز قضا جز این قدر ننمایند
پیمانهٔ عمر ماست می‌پیمایند
जो पिंड इस ऐवान के बासी हैं,
अक़्लमंदों के असमंजस के कारण हैं;
सावधान, अक़्ल का सिरा गुम न कर,
कि जो शासक हैं वे ही घबराए फिरते हैं।
اجرام که ساکنان این ایوان‌اند
اسباب تردد خردمندان‌اند
هان تا سر رشتهٔ خرد گم نکنی
کآنان که مدبرند سرگردان‌اند
मेरे आने से आसमान को कोई फ़ायदा न हुआ,
मेरे जाने से उसका वैभव और मान न बढ़ा;
और किसी से भी मेरे दो कानों ने न सुना
कि यह मेरा आना और जाना किसलिए था।
از آمدنم نبود گردون را سود
وز رفتن من جلال و جاهش نفزود
وز هیچ کسی نیز دو گوشم نشنود
کاین آمدن و رفتنم از بهر چه بود
दुख उठाने से आदमी आज़ाद होता है,
बूँद जब सीप की क़ैद सहती है तो मोती बनती है;
अगर धन न रहे, सिर जगह पर बना रहे,
पैमाना जब ख़ाली हो तो फिर भर जाता है।
از رنج کشیدن آدمی حر گردد
قطره چو کشد حبس صدف در گردد
گر مال نماند سر بماناد به جای
پیمانه چو شد تهی دگر پر گردد
अफ़सोस कि पूँजी हाथ से निकल गई,
और मौत के हाथों बहुत जिगर ख़ून हुए;
कोई उस जहान से न आया कि मैं उससे पूछूँ
कि दुनिया के मुसाफ़िरों का हाल क्या हुआ।
افسوس که سرمایه ز کف بیرون شد
وز دست اجل بسی جگرها خون شد
کس نآمد از آن جهان که پرسم از وی
کاحوال مسافران دنیا چون شد
अफ़सोस कि जवानी का पन्ना लपेट लिया गया,
और वह ताज़ा बहार-सी ज़िन्दगी बीत गई;
आनन्द का वह पंछी जिसका नाम शबाब था,
अफ़सोस, न जाना कब आया, कब गया।
افسوس که نامهٔ جوانی طی شد
و آن تازه بهار زندگانی دی شد
آن مرغ طرب که نام او بود شباب
افسوس ندانم که کی آمد کی شد
कितना ही होगा कि हम न होंगे और जहान होगा,
न हमारा नाम, न कोई निशान होगा;
इससे पहले हम न थे और कोई कमी न थी,
इसके बाद जब न होंगे, वैसा ही होगा।
ای بس که نباشیم و جهان خواهد بود
نی نام ز ما و نی‌ نشان خواهد بود
زین پیش نبودیم و نبد هیچ خلل
زین پس چو نباشیم همان خواهد بود
यह अक़्ल जो ख़ुशनसीबी की राह पर दौड़ती है,
दिन में सौ बार ख़ुद तुझसे कहती है:
इस एक दम, अपने वक़्त को समझ ले, कि तू
वह साग नहीं जिसे काटें और फिर उगे।
این عقل که در ره سعادت پوید
روزی صد بار خود تو را می‌گوید
دریاب تو این یک دم وقتت که نه‌ای
آن تره که بدروند و دیگر روید
यह उम्र का क़ाफ़िला अजब गुज़रता है,
उस दम को समझ ले जो उमंग के साथ गुज़रता है;
साक़ी, साथियों के कल का ग़म क्यों खाता है,
प्याला आगे ला, कि रात गुज़रती है।
این قافلهٔ عمر عجب می‌گذرد
دریاب دمی که با طرب می‌گذرد
ساقی غم فردای حریفان چه خوری
پیش آر پیاله را که شب می‌گذرد
मेरी पीठ पर ज़माने की ओर से तू आ रहा है,
और मुझसे सारा काम बेढंगा हो रहा है;
जान ने कूच का इरादा किया, मैंने कहा मत जा,
उसने कहा क्या करूँ, घर गिर रहा है।
بر پشت من از زمانه تو می‌آید
وز من همه کار نانکو می‌آید
جان عزم رحیل کرد و گفتم بمرو
گفتا چه کنم خانه فرومی‌آید
आसमान की चरख़ पर कोई हावी न हुआ,
और आदमी खाने से ज़मीन तृप्त न हुई;
तू इस पर घमंड मत कर कि उसने तुझे नहीं खाया,
जल्दी मत कर, वह खा लेगी, देर तो नहीं हुई।
بر چرخ فلک هیچ کسی چیر نشد
وز خوردن آدمی زمین سیر نشد
مغرور بدانی که نخورده‌ست تو را
تعجیل مکن هم بخورد دیر نشد
तेरी आँख के सामने जग को भले ही सजाएँ,
उधर न झुक, कि अक़्लमंद नहीं झुकते;
तेरे जैसे बहुत जाते हैं और बहुत आते हैं,
अपना हिस्सा झपट ले, इससे पहले कि तुझे झपट लें।
بر چشم تو عالم ارچه می‌آرایند
مگرای بدان که عاقلان نگرایند
بسیار چو تو روند و بسیار آیند
بربای نصیب خویش کت بربایند
जब क़ज़ा की क़लम मुझ पर मेरे बिना चलती है,
तो उसका भला-बुरा मुझसे क्यों जोड़ते हैं;
कल मेरे बिना, आज कल-सा मेरे और तेरे बिना,
कल किस दलील पर मुझे न्यायी के सामने बुलाएँगे।
بر من قلم قضا چو بی من رانند
پس نیک و بدش ز من چرا می‌دانند
دی بی من و امروز چو دی بی من و تو
فردا به چه حجتم به داور خوانند
कब तक तू रंग और ख़ुशबू का बन्दी रहेगा,
कब तक हर बुरे-भले के पीछे रहेगा;
अगर तू ज़मज़म का चश्मा हो या आब-ए-हयात,
आख़िर मिट्टी के दिल में उतर जाएगा।
تا چند اسیر رنگ و بو خواهی شد
چند از پی هر زشت و نکو خواهی شد
گر چشمهٔ زمزمی و گر آب حیات
آخر به دل خاک فروخواهی شد
जब तक क़लन्दरी की राह न चले, कुछ नहीं होता,
जब तक चेहरा दिल के ख़ून से न धोए, कुछ नहीं होता;
वहम क्या पकाता है, जब तक दिल जलों की तरह
आज़ाद होकर अपना त्याग न कहे, कुछ नहीं होता।
تا راه قلندری نپویی نشود
رخساره بخون دل نشویی نشود
سودا چه پزی تا که چو دلسوختگان
آزاد به ترک خود نگویی نشود
जब से ज़ुहरा और चाँद आसमान में प्रकट हुए,
शुद्ध शराब से बेहतर किसी ने कुछ न देखा;
मैं शराब बेचने वालों पर हैरान हूँ, कि वे
इससे बेहतर जो बेचें, क्या ख़रीदना चाहेंगे।
تا زهره و مه در آسمان گشت پدید
بهتر ز می ناب کسی هیچ ندید
من در عجبم ز می‌فروشان کایشان
به زآن‌که فروشند چه خواهند خرید
जब रोज़ी और उम्र घटा-बढ़ा नहीं सकते,
दिल को घटी-बढ़ी से उदास करना ठीक नहीं;
मेरा और तेरा काम मेरी और तेरी राय पर नहीं,
मोम को भी अपने हाथ से नहीं गढ़ सकते।
چون روزی و عمر بیش و کم نتوان کرد
دل را به کم و بیش دژم نتوان کرد
کار من و تو چنان‌که رای من و توست
از موم به دست خویش هم نتوان کرد
वह जीवित जो अपनी क़ुदरत से सिर और चेहरा गढ़ता है,
वही सदा दुश्मन का काम भी बनाता है;
कहते हैं सुराही बनाने वाला मुसलमान न था,
तू उसे क्या कहेगा जो लौकी गढ़ता है।
حیی که به قدرت سر و رو می‌سازد
همواره همو کار عدو می‌سازد
گویند قرابه‌گر مسلمان نبود
او را تو چه گویی که کدو می‌سازد
जब ज़माने में ताज़े फूल की आवाज़ दें,
हुक्म दे, ऐ सनम, कि शराब नाप-भर दें;
हूर और महलों से, बहिश्त और दोज़ख़ से
बेफ़िक्र बैठ, कि वह सब बस अफ़वाह है।
در دهر چو آواز گل تازه دهند
فرمای بتا که می به‌اندازه دهند
از حور و قصور و ز بهشت و دوزخ
فارغ بنشین که آن هر آوازه دهند
ज़माने में जिसके पास आधी रोटी है,
और बैठने को कोई घोंसला है,
न किसी का सेवक, न किसी का स्वामी है,
कह, ख़ुश जी, कि उसका जहान भला है।
در دهر هر آن‌که نیم‌نانی دارد
از بهر نشست آشیانی دارد
نه خادم کس بود نه مخدوم کسی
گو شاد بزی که خوش‌جهانی دارد
क़ज़ा के किसान ने हम-सा बहुत बोया और काटा,
बेकार ग़म खाना कोई फ़ायदा नहीं देता;
क़दह शराब से भर और मेरी हथेली में जल्दी रख,
कि मैं फिर पी लूँ, कि जो होना था सब हुआ।
دهقان قضا بسی چو ما کشت و درود
غم خوردن بیهوده نمی‌دارد سود
پر کن قدح می به کفم درنه زود
تا باز خورم که بودنی‌ها همه بود
दिन अच्छा है और हवा न गरम है न सर्द,
बादल फूलों के बाग़ के चेहरे से धूल धो रहा है;
बुलबुल अपने हाल की ज़बान में पीले फूल से
पुकार रही है कि शराब पीनी चाहिए।
روزی‌ست خوش و هوا نه گرم است و نه سرد
ابر از رخ گلزار همی‌شوید گرد
بلبل به زبان حال خود با گل زرد
فریاد همی‌کند که می باید خورد
इससे पहले कि तेरे सिर पर छापा मारें,
हुक्म दे कि गुलाबी शराब लाएँ;
तू सोना नहीं, ऐ ग़ाफ़िल नादान, कि तुझे
मिट्टी में रखें और फिर बाहर निकालें।
زآن پیش که بر سرت شبیخون آرند
فرمای که تا بادهٔ گلگون آرند
تو زر نه‌ای ای غافل نادان که تو را
در خاک نهند و باز بیرون آرند
तेरी उम्र कब तक ख़ुदपरस्ती में गुज़रेगी,
या न होने और होने के पीछे गुज़रेगी;
शराब पी, कि वह उम्र जिसके पीछे मौत है,
वही भली जो नींद में या मस्ती में गुज़रे।
عمرت تا کی به خودپرستی گذرد
یا در پی نیستی و هستی گذرد
می نوش که عمری که اجل در پی اوست
آن به که به خواب یا به مستی گذرد
किसी ने मौत के रहस्य की मुश्किल न खोली,
किसी ने दायरे से एक क़दम बाहर न रखा;
मैं देखता हूँ, नौसिखिए से उस्ताद तक,
जो भी माँ से जन्मा, उसके हाथ में बेबसी है।
کس مشکل اسرار اجل را نگشاد
کس یک قدم از دایره بیرون ننهاد
من می‌نگرم ز مبتدی تا استاد
عجز است به دست هرکه از مادر زاد
जग से लालच कम कर और सन्तोष से जी,
ज़माने के भले-बुरे से नाता तोड़;
शराब हाथ में और किसी दिलबर की ज़ुल्फ़ थाम, कि जल्दी
यह भी गुज़र जाएगा और ये कुछ दिन न रहेंगे।
کم کن طمع از جهان و می‌زی خرسند
از نیک و بد زمانه بگسل پیوند
می در کف و زلف دلبری گیر که زود
هم بگذرد و نماند این روزی چند
भले ही मेरे ग़म और दुख का सिलसिला लम्बा है,
तेरे ऐश और उमंग का सिर ऊँचा है;
दोनों पर टेक न लगा, कि आसमान का दौर
परदे में हज़ार तरह के खेल रचता है।
گرچه غم و رنج من درازی دارد
عیش و طرب تو سرفرازی دارد
بر هر دو مکن تکیه که دوران فلک
در پرده هزار گونه بازی دارد
आसमान ज़मीन से कोई फूल नहीं उठाता
कि उसे तोड़कर फिर ज़मीन को न सौंप दे;
अगर बादल पानी की तरह मिट्टी को उठा ले,
क़यामत तक अज़ीज़ों का ख़ून बरसाए।
گردون ز زمین هیچ گلی برنارد
کش نشکند و هم به زمین نسپارد
گر ابر چو آب خاک را بردارد
تا حشر همه خون عزیزان بارد
अगर तेरी एक साँस ज़िन्दगी से गुज़रे,
उसे प्रसन्नता के सिवा न गुज़रने दे;
सावधान, कि जग के सौदे की पूँजी
उम्र है, जैसा तू उसे गुज़ारे वैसा गुज़रती है।
گر یک نفست ز زندگانی گذرد
مگذار که جز به شادمانی گذرد
هشدار که سرمایهٔ سودای جهان
عمر است چنان کش گذرانی گذرد
कहते हैं बहिश्त और मृगनयनी हूर होगी,
वहाँ शराब और दूध और शहद होगा;
अगर हमने शराब और माशूक़ चुना तो क्या डर,
जब आख़िर काम का अंजाम ऐसा ही होगा।
گویند بهشت و حورعین خواهد بود
آنجا می و شیر و انگبین خواهد بود
گر ما می و معشوق گزیدیم چه باک
چون عاقبت کار چنین خواهد بود
कहते हैं बहिश्त और हूर और कौसर होगा,
शराब, दूध, शहद और शक्कर की नदी होगी;
क़दह शराब से भर और मेरी हथेली पर रख,
एक नक़द हज़ार उधार से भला है।
گویند بهشت و حور و کوثر باشد
جوی می و شیر و شهد و شکر باشد
پر کن قدح باده و بر دستم نه
نقدی ز هزار نسیه خوش‌تر باشد
कहते हैं वे सब जो परहेज़ करते हैं,
जिस हाल में मरेंगे उसी हाल में उठेंगे;
हम शराब और माशूक़ के साथ इसीलिए सदा हैं,
कि क़यामत में हमें वैसा ही जगाएँ।
گویند هر آن کسان که با پرهیزند
زآن‌سان که بمیرند چنان برخیزند
ما با می و معشوقه از آنیم مدام
باشد که به حشرمان چنان انگیزند
शराब पी, कि दिल से बहुत-कम का भाव मिटाती है,
और बहत्तर मिल्लतों की चिन्ता ले जाती है;
उस कीमिया से परहेज़ न कर, जिसकी
एक घूँट हज़ार रोग हर लेती है।
می خور که ز دل کثرت و قلت ببرد
و اندیشه هفتاد و دو ملت ببرد
پرهیز مکن ز کیمیایی که از او
یک جرعه خوری هزار علت ببرد
जो भी राज़ ज्ञानी के दिल में हो,
उसे अन्क़ा से भी छिपा रहना चाहिए;
कि सीप में छिपाव से मोती बनता है
वह बूँद जो समुद्र के दिल का राज़ है।
هر راز که اندر دل دانا باشد
باید که نهفته‌تر ز عنقا باشد
کاندر صدف از نهفتگی گردد در
آن قطره که راز دل دریا باشد
हर सुबह जब लाले का चेहरा ओस लेता है,
और चमन में बैंगनी का सिर झुकता है,
मुझे कली से इनसाफ़ ख़ूब भाता है,
कि वह अपना दामन समेटे रखती है।
هر صبح که روی لاله شبنم گیرد
بالای بنفشه در چمن خم گیرد
انصاف مرا ز غنچه خوش می‌آید
کاو دامن خویشتن فراهم گیرد
मेरा दिल कभी ज्ञान से वंचित न रहा,
रहस्यों में कम ही रहा जो मुझ पर न खुला;
बहत्तर साल रात-दिन मैंने सोचा,
मुझ पर यह खुला कि कुछ भी नहीं खुला।
هرگز دل من ز علم محروم نشد
کم ماند ز اسرار که معلوم نشد
هفتاد و دو سال فکر کردم شب و روز
معلومم شد که هیچ معلوم نشد
आशा का बीज भी खलिहान में रह जाता है,
बाग़ और घर भी तेरे और मेरे बिना रह जाते हैं;
अपना चाँदी-सोना दिरहम से जौ तक
दोस्त के साथ ख़र्च कर, वरना दुश्मन को रह जाएगा।
هم دانهٔ امید به خرمن ماند
هم باغ و سرای بی تو و من ماند
سیم و زر خویش از درمی تا به جوی
با دوست بخور گرنه به دشمن ماند
अनुकूल यार सब हाथ से चले गए,
मौत के पाँव तले एक-एक कर नीचे हुए;
हमने उम्र की महफ़िल में एक ही शराब पी,
वे दो-तीन दौर हमसे पहले मस्त हो गए।
یاران موافق همه از دست شدند
در پای اجل یکان یکان پست شدند
خوردیم ز یک شراب در مجلس عمر
دوری دو سه پیشتر ز ما مست شدند
एक जाम शराब सौ दिल और दीन के बराबर है,
एक घूँट शराब चीन के राज के बराबर है;
ज़मीन के चेहरे पर लाल शराब के सिवा कोई
ऐसी कड़वाहट नहीं जो हज़ार मीठी जानों के बराबर हो।
یک جام شراب صد دل و دین ارزد
یک جرعهٔ می مملکت چین ارزد
جز بادهٔ لعل نیست در روی زمین
تلخی که هزار جان شیرین ارزد
पानी की एक बूँद थी, समुद्र से मिल गई,
मिट्टी का एक ज़र्रा ज़मीन से एक हो गया;
इस जग में तेरा आना-जाना क्या है —
एक मक्खी प्रकट हुई और ओझल हो गई।
یک قطرهٔ آب بود با دریا شد
یک ذرهٔ خاک با زمین یکتا شد
آمدشدن تو اندر این عالم چیست
آمد مگسی پدید و ناپیدا شد
अगर दो दिन में एक रोटी आदमी को मिल जाए,
किसी टूटे कूज़े से एक दम ठंडा पानी,
अपने से कम किसी का मातहत क्यों हो,
या अपने-सा किसी की सेवा क्यों करे।
یک نان به دو روز اگر بود حاصل مرد
از کوزه شکسته‌ای دمی آبی سرد
مأمور کم از خودی چرا باید بود
یا خدمت چون خودی چرا باید کرد
वह लाल शराब सादे शीशे में ला,
और उस हर आज़ाद के हमराज़ और साथी को ला;
चूँकि तू जानता है कि मिट्टी के जग की मुद्दत
हवा है जो जल्दी गुज़रे, शराब ला।
آن لعل در آبگینهٔ ساده بیار
وآن محرم و مونس هر آزاده بیار
چون می‌دانی که مدت عالم خاک
باد است که زود بگذرد باده بیار
जो होना है उसकी, ऐ दोस्त, चिन्ता क्यों करे,
और बेकार सोच से दिल और जान को घायल करे;
ख़ुश जी और जग को प्रसन्नता से गुज़ार,
काम की तदबीर तेरे साथ पहले से नहीं की गई।
از بودنی ای دوست چه داری تیمار
وز فکرت بیهوده دل و جان افکار
خرم بزی و جهان به شادی گذران
تدبیر نه با تو کرده‌اند اول کار
आसमान जो ग़म के सिवा और कुछ नहीं बढ़ाते,
कुछ भी जगह पर नहीं रखते जब तक फिर न छीनें;
अगर आने वाले जान लें कि हम
ज़माने से क्या भुगतते हैं, तो न आएँ।
افلاک که جز غم نفزایند دگر
ننهند به جا تا نربایند دگر
ناآمدگان اگر بدانند که ما
از دهر چه می‌کشیم نایند دگر
ऐ दिल, इस पुराने जग का ग़म न खा,
बेकार नहीं है, बेकार के ग़म न खा;
चूँकि जो था बीत गया और अनहुआ अभी प्रकट नहीं,
प्रसन्न रह, हुए और अनहुए का ग़म न खा।
ای دل غم این جهان فرسوده مخور
بیهوده نه‌ای غمان بیهوده مخور
چون بوده گذشت و نیست نابوده پدید
خوش باش غم بوده و نابوده مخور
ऐ दिल, जग के सारे सामान अपने माने,
आनन्द का बाग़ हरियाली से सजा माने,
और फिर उस हरियाली पर एक रात ओस-सा
बैठा और सुबह उठ गया — ऐसा ही माने।
ایدل همه اسباب جهان خواسته گیر
باغ طربت به سبزه آراسته گیر
و آنگاه بر آن سبزه شبی چون شبنم
بنشسته و بامداد برخاسته گیر
ये क़ब्रों के बासी मिट्टी और ग़ुबार बने,
हर ज़र्रे ने हर ज़र्रे से किनारा लिया;
आह, यह क्या शराब है कि गिनती के दिन तक
बेख़ुद हुए और हर काम से बेख़बर हैं।
این اهل قبور خاک گشتند و غبار
هر ذره ز هر ذره گرفتند کنار
آه این چه شراب است که تا روز شمار
بیخود شده و بی‌خبرند از همه کار
ख़म के सिर की ईंट जम की बादशाहत से भली,
क़दह की ख़ुशबू मरयम के भोजन से भली;
ख़ुमारी सीने से सहर की एक आह
बू-सईद और अदहम की पुकार से भली।
خشت سر خم ز ملکت جم خوشتر
بوی قدح از غذای مریم خوشتر
آه سحری ز سینهٔ خماری
از نالهٔ بوسعید و ادهم خوشتر
आसमान के दायरे में जिसकी गहराई अदृश्य है,
एक जाम है जिसे सबको बारी-बारी चखाते हैं;
जब बारी तेरे दौर में पहुँचे, आह न कर,
प्रसन्नता से शराब पी, कि यह दौर है, ज़ुल्म नहीं।
در دایره سپهر ناپیدا غور
جامی‌ست که جمله را چشانند بدور
نوبت چو به دور تو رسد آه مکن
می نوش به خوشدلی که دور است نه جور
कल मैंने एक कुम्हार को बाज़ार में देखा,
एक ढेले मिट्टी पर बहुत लात मार रहा था;
और वह मिट्टी हाल की ज़बान में उससे कह रही थी:
मैं भी तुझ-सी थी, मेरे साथ भला बरत।
دی کوزه‌گری بدیدم اندر بازار
بر پاره گلی لگد همی زد بسیار
و آن گل بزبان حال با او می‌گفت
من همچو تو بوده‌ام مرا نیکودار
उस शराब में से पी जो सदा की ज़िन्दगी है,
जवानी के आनन्द की पूँजी है, पी;
आग-सी जलाने वाली, पर ग़म को
ज़िन्दगी के पानी-सी सँवारने वाली है, पी।
ز آن می که حیات جاودانیست بخور
سرمایه لذت جوانی است بخور
سوزنده چو آتش است لیکن غم را
سازنده چو آب زندگانی است بخور
अगर शराब पिए तो अक़्लमंदों के साथ पी,
या किसी लालेरुख़ हँसती सुन्दरी के साथ पी;
ज़्यादा न पी, बार-बार न कर, फ़ाश न कर,
थोड़ी पी, कभी-कभी पी, और छिपकर पी।
گر باده خوری تو با خردمندان خور
یا با صنمی لاله رخی خندان خور
بسیار مخور ورد مکن فاش مساز
اندک خور و گه گاه خور و پنهان خور
सहर का वक़्त है, उठ, ऐ अनोखे लड़के,
बिल्लौरी साग़र को लाल शराब से भर;
कि यह एक दम की उधार इस फ़ना के कोने में
बहुत ढूँढेगा और फिर नहीं पाएगा।
وقت سحر است خیز ای طرفه پسر
پر بادهٔ لعل کن بلورین ساغر
کاین یکدم عاریت در این کنج فنا
بسیار بجویی و نیابی دیگر
इस लम्बी राह के सारे जाने वालों में से
कौन लौटकर आया कि हमसे राज़ कहे;
सो इस लालच और मुहताजी के दोराहे पर
कुछ न छोड़, कि तू लौटकर नहीं आ रहा।
از جملهٔ رفتگان این راه دراز
باز آمده کیست تا به ما گوید راز
پس بر سر این دو راههٔ آز و نیاز
تا هیچ نمانی که نمی‌آیی باز
ऐ अक़्लमंद बूढ़े, सवेरे उठ,
और उस मिट्टी छानते बच्चे को ग़ौर से देख;
उसे नसीहत दे, कह कि नरम-नरम छान,
कैक़ुबाद का दिमाग़ और परवेज़ की आँख।
ای پیر خردمند پگه‌تر برخیز
و آن کودک خاکبیز را بنگر تیز
پندش ده گو که نرم نرمک می‌بیز
مغز سر کیقباد و چشم پرویز
सहर का वक़्त है, उठ, ऐ नाज़ के आधार,
नरम-नरम शराब पी और चंग बजा;
कि जो हैं वे बहुत देर नहीं ठहरते,
और जो चले गए, कोई लौटकर नहीं आता।
وقت سحر است خیز ای مایه ناز
نرمک نرمک باده خور و چنگ نواز
کانها که بجایند نپایند بسی
و آنها که شدند کس نمیاید باز
मैंने तूस की दीवार पर बैठा एक पंछी देखा,
जिसने आगे कैकावूस की खोपड़ी रखी थी;
खोपड़ी से वह कह रहा था: अफ़सोस, अफ़सोस,
कहाँ गई घंटियों की धुन और कहाँ नक़्क़ारों की गूँज।
مرغی دیدم نشسته بر باره طوس
در پیش نهاده کله کیکاووس
با کله همی گفت که افسوس افسوس
کو بانگ جرسها و کجا ناله کوس
एक जाम है जिसे अक़्ल शाबाशी देती है,
मुहब्बत से सौ बोसे उसके माथे पर देती है;
यह ज़माने का कुम्हार ऐसा नाज़ुक जाम
बनाता है और फिर ज़मीन पर पटकता है।
جامی است که عقل آفرین میزندش
صد بوسه ز مهر بر جبین میزندش
این کوزه‌گر دهر چنین جام لطیف
می‌سازد و باز بر زمین میزندش
ख़य्याम, अगर शराब से मस्त है तो प्रसन्न रह,
किसी माहरुख़ के साथ बैठा है तो प्रसन्न रह;
चूँकि जग के काम का अंजाम अनहोनी है,
मान ले कि तू नहीं है, है की तरह प्रसन्न रह।
خیام اگر ز باده مستی خوش باش
با ماهرخی اگر نشستی خوش باش
چون عاقبت کار جهان نیستی است
انگار که نیستی چو هستی خوش باش
कल रात मैं कुम्हार की कार्यशाला में गया,
मैंने दो हज़ार कूज़े देखे, बोलते और चुप;
अचानक एक कूज़े ने हल्ला मचाया:
कहाँ है कूज़ा बनाने वाला, कूज़ा ख़रीदने और बेचने वाला।
در کارگه کوزه‌گری رفتم دوش
دیدم دو هزار کوزه گویا و خموش
ناگاه یکی کوزه برآورد خروش
کو کوزه‌گر و کوزه‌خر و کوزه فروش
ज़माना उस पर लज्जा रखता है
जो ज़माने के ग़म में उदास बैठे;
शीशे में शराब पी, चंग की तान के साथ,
इससे पहले कि शीशा पत्थर से टकराए।
ایام زمانه از کسی دارد ننگ
کو در غم ایام نشیند دلتنگ
می خور تو در آبگینه با ناله چنگ
زان پیش که آبگینه آید بر سنگ
काली मिट्टी की गहराई से ज़ुहल के शिखर तक
मैंने सारी मुश्किलों को हल कर लिया;
हीले से हर मुश्किल की गाँठ खोल दी,
हर गाँठ खुल गई सिवा मौत की गाँठ के।
از جرم گل سیاه تا اوج زحل
کردم همه مشکلات کلی را حل
بگشادم بندهای مشکل به حیل
هر بند گشاده شد به جز بند اجل
फूलों के ढेर से भी ताज़े सर्व-क़द के साथ
शराब का जाम और फूल का दामन हाथ से न रख;
इससे पहले कि अचानक मौत की हवा से
हमारी उम्र का पैरहन फूल के पैरहन-सा हो।
با سرو قدی تازه‌تر از خرمن گل
از دست منه جام می و دامن گل
زان پیش که ناگه شود از باد اجل
پیراهن عمر ما چو پیراهن گل
ऐ दोस्त, आ, कि कल का ग़म न खाएँ,
और उम्र के इस एक दम को ग़नीमत गिनें;
कल जब हम इस फ़ना के सराय से गुज़रेंगे,
सात-हज़ार-साल वालों के बराबर होंगे।
ای دوست بیا تا غمِ فردا نخوریم
وین یک دمِ عمر را غنیمت شمریم
فردا که ازین دیرِ فنا درگذریم
با هفت‌هزارسالگان سربه‌سریم
यह आसमान की चरख़ जिसमें हम हैरान हैं,
हम इसे ख़याल के फ़ानूस-सा एक मिसाल जानते हैं;
सूरज को चराग़ जान और जग को फ़ानूस,
हम उसमें घूमती तस्वीरों-से हैरान हैं।
این چرخ فلک که ما در او حیرانیم
فانوس خیال از او مثالی دانیم
خورشید چراغ دان و عالم فانوس
ما چون صوریم کاندر او حیرانیم
नींद से उठ, कि कुछ शराब पी लें,
इससे पहले कि ज़माने से एक ताप पी लें;
कि यह झगड़ालू चेहरे वाला चरख़ किसी दिन अचानक
इतना वक़्त न देगा कि एक घूँट पानी पी लें।
برخیز ز خواب تا شرابی بخوریم
زان پیش که از زمانه تابی بخوریم
کاین چرخ ستیزه روی ناگه روزی
چندان ندهد زمان که آبی بخوریم
उठूँगा और शुद्ध शराब का इरादा करूँगा,
अपने चेहरे का रंग उन्नाब के रंग-सा करूँगा;
इस दख़ल देती अक़्ल के चेहरे पर एक मुट्ठी शराब
ऐसे मारूँगा कि उसे नींद में डाल दूँ।
برخیزم و عزم باده ناب کنم
رنگ رخ خود به رنگ عناب کنم
این عقل فضول پیشه را مشتی می
بر روی زنم چنانکه در خواب کنم
मैं मिट्टी के बिछौने पर सोए हुओं को देखता हूँ,
ज़मीन के नीचे छिपे हुओं को देखता हूँ;
जितना अनहोनी के मैदान में नज़र दौड़ाता हूँ,
न-आए हुओं और गए हुओं को देखता हूँ।
بر مفرش خاک خفتگان می‌بینم
در زیرزمین نهفتگان می‌بینم
چندانکه به صحرای عدم مینگرم
ناآمدگان و رفتگان می‌بینم
कब तक हम हर रोज़ अक़्ल के बन्दी हों,
ज़माने में क्या सौ साल क्या एक दिन हों;
कटोरे में शराब डाल, इससे पहले कि हम
कुम्हारों की कार्यशाला में कूज़ा हो जाएँ।
تا چند اسیر عقل هر روزه شویم
در دهر چه صد ساله چه یکروزه شویم
در ده تو بکاسه می از آن پیش که ما
در کارگه کوزه‌گران کوزه شویم
चूँकि इस ज़माने में हमारा ठिकाना टिकाऊ नहीं,
तो शराब और माशूक़ के बिना बड़ी ख़ता है;
कब तक क़दीम और हादिस से मेरी उम्मीद और डर,
जब मैं चला गया, जग क्या हादिस क्या क़दीम।
چون نیست مقام ما در این دهر مقیم
پس بی می و معشوق خطائیست عظیم
تا کی ز قدیم و محدث امیدم و بیم
چون من رفتم جهان چه محدث چه قدیم
सूरज को मैं मिट्टी में नहीं छिपा सकता,
और ज़माने के रहस्य नहीं कह सकता;
सोच के समुद्र से अक़्ल ने एक मोती निकाला,
जिसे डर से मैं बेध नहीं सकता।
خورشید به گل نهفت می‌نتوانم
و اسرار زمانه گفت می‌نتوانم
از بحر تفکرم برآورد خرد
دری که ز بیم سفت می‌نتوانم
दुश्मन ने ग़लत कहा कि मैं फ़ैलसूफ़ हूँ,
ईश्वर जानता है कि जो उसने कहा वह मैं नहीं;
पर चूँकि मैं इस ग़म के घोंसले में आया हूँ,
आख़िर कम-से-कम इतना तो जानूँ कि मैं कौन हूँ।
دشمن به غلط گفت که من فلسفیم
ایزد داند که آنچه او گفت نیم
لیکن چو در این غم آشیان آمده‌ام
آخر کم از آنکه من بدانم که کیم
हम वे हैं जो ख़ुशी की जड़ और ग़म की खान हैं,
इनसाफ़ की पूँजी और ज़ुल्म की नींव हैं;
हम नीच हैं और ऊँचे, कमाल हैं और कमी,
जँग खाया आईना हैं और जमशेद का जाम हैं।
مائیم که اصل شادی و کان غمیم
سرمایهٔ دادیم و نهاد ستمیم
پستیم و بلندیم و کمالیم و کمیم
آئینهٔ زنگ خورده و جام جمیم
मैं शराब तंगदस्ती के डर से नहीं छोड़ता,
या रुसवाई और मस्ती के ग़म से नहीं छोड़ता;
मैं शराब प्रसन्न दिल के लिए पीता था,
अब जब तू मेरे दिल में बस गई, नहीं पीता।
من می نه ز بهر تنگدستی نخورم
یا از غم رسوایی و مستی نخورم
من می ز برای خوشدلی میخوردم
اکنون که تو بر دلم نشستی نخورم
मैं शुद्ध शराब के बिना जी नहीं सकता,
शराब बिना तन का बोझ नहीं उठा सकता;
मैं उस दम का बन्दा हूँ जब साक़ी कहे:
एक जाम और ले — और मैं न ले सकूँ।
من بی می ناب زیستن نتوانم
بی باده کشید بارتن نتوانم
من بنده آن دمم که ساقی گوید
یک جام دگر بگیر و من نتوانم
हर कुछ अरसे में एक उठता है कि मैं हूँ,
नेमत और चाँदी-सोने के साथ आता है कि मैं हूँ;
जब उसका छोटा काम किसी दिन बन जाता है,
अचानक मौत घात से निकलती है कि मैं हूँ।
هر یک چندی یکی برآید که منم
با نعمت و با سیم و زر آید که منم
چون کارک او نظام گیرد روزی
ناگه اجل از کمین برآید که منم
एक अरसा बचपन में उस्ताद के पास रहे,
एक अरसा अपनी उस्तादी पर ख़ुश हुए;
बात का अन्त सुन, कि हमें क्या मिला:
मिट्टी से आए और हवा हो गए।
یک چند به کودکی باستاد شدیم
یک چند به استادی خود شاد شدیم
پایان سخن شنو که ما را چه رسید
از خاک در آمدیم و بر باد شدیم
एक दिन भी जग के बन्धन से आज़ाद नहीं,
एक साँस-भर भी अपने अस्तित्व से ख़ुश नहीं;
मैंने ज़माने की शागिर्दी बहुत की,
जग के काम में अब भी उस्ताद नहीं।
یک روز ز بند عالم آزاد نیم
یک دمزدن از وجود خود شاد نیم
شاگردی روزگار کردم بسیار
در کار جهان هنوز استاد نیم
बीते कल की कुछ भी याद न कर,
आने वाले कल की जो अभी नहीं आया, फ़रियाद न कर;
न-आए और बीते पर बुनियाद न रख,
अभी प्रसन्न रह और उम्र हवा पर न लुटा।
از دی که گذشت هیچ ازو یاد مکن
فردا که نیامده ست فریاد مکن
برنامده و گذشته بنیاد مکن
حالی خوش باش و عمر بر باد مکن
ऐ आँख, अगर अन्धी नहीं तो क़ब्र देख,
और इस फ़ितने और शोर से भरे जग को देख;
शाह और सरदार और बड़े मिट्टी के नीचे हैं,
चाँद-से चेहरे चींटी के मुँह में देख।
ای دیده اگر کور نئی گور ببین
وین عالم پر فتنه و پر شور ببین
شاهان و سران و سروران زیر گلند
روهای چو مه در دهن مور ببین
उठ और गुज़रते जग का ग़म न खा,
बैठ और एक दम प्रसन्नता से गुज़ार;
अगर जग के स्वभाव में कोई वफ़ा होती,
तेरी बारी औरों से तुझ तक न आती।
برخیز و مخور غم جهان گذران
بنشین و دمی به شادمانی گذران
در طبع جهان اگر وفایی بودی
نوبت بتو خود نیامدی از دگران
चूँकि इस नमक के मैदान में आदमी का हासिल
जान निकलने तक ग़म खाने के सिवा कुछ नहीं;
प्रसन्न-दिल वह जो इस जग से जल्दी चला गया,
और सुखी वह जो जग में आया ही नहीं।
چون حاصل آدمی در این شورستان
جز خوردن غصه نیست تا کندن جان
خرم دل آنکه زین جهان زود برفت
و آسوده کسی که خود نیامد به جهان
मैं गया, कि इस अन्याय के ठिकाने में
हाथ में हवा के सिवा कुछ न होगा;
उसे मेरी मौत पर ख़ुश होना चाहिए
जो मौत के हाथों आज़ाद हो सकता है।
رفتم که در این منزل بیداد بدن
در دست نخواهد به جز از باد بدن
آن را باید به مرگ من شاد بدن
کز دست اجل تواند آزاد بدن
मैंने एक रिन्द को ज़मीन के घोड़े पर बैठा देखा,
न कुफ़्र, न इस्लाम, न दुनिया, न दीन;
न हक़, न हक़ीक़त, न शरीअत, न यक़ीन —
दोनों जहान में किसमें ऐसा साहस।
رندی دیدم نشسته بر خنگ زمین
نه کفر و نه اسلام و نه دنیا و نه دین
نه حق نه حقیقت نه شریعت نه یقین
اندر دو جهان کرا بود زهره این
एक हड्डी पर गिद्ध-सा सन्तुष्ट रहना
इससे भला कि किसी नीच के दस्तरख़ान का टुकड़ा हो;
जौ की अपनी रोटी के साथ, सच में, भला है
इससे कि हर नीच का सना-छना खाना खाए।
قانع به یک استخوان چو کرکس بودن
به ز آن که طفیل خوان ناکس بودن
با نان جوین خویش حقا که به است
کالوده و پالوده هر خس بودن
एक क़ौम दीन की राह में सोच में है,
एक क़ौम यक़ीन की राह में गुमान में पड़ी है;
मुझे उससे डर है कि किसी दिन आवाज़ आए:
ऐ बेख़बरो, राह न वह है न यह।
قومی متفکرند اندر ره دین
قومی به گمان فتاده در راه یقین
میترسم از آن که بانگ آید روزی
کای بیخبران راه نه آنست و نه این
आसमान में एक बैल है जिसका नाम परवीन है,
एक और बैल ज़मीन के नीचे छिपा है;
अक़्ल की आँख यक़ीन से खोल,
दो बैलों के बीच एक मुट्ठी गधे देख।
گاویست در آسمان و نامش پروین
یک گاو دگر نهفته در زیر زمین
چشم خردت باز کن از روی یقین
زیر و زبر دو گاو مشتی خر بین
अगर आसमान पर मेरा हाथ ईश्वर-सा होता,
मैं इस आसमान को बीच से हटा देता;
नए सिरे से एक और आसमान ऐसा बनाता
कि आज़ाद मन की मुराद आसानी से पाता।
گر بر فلکم دست بدی چون یزدان
برداشتمی من این فلک را ز میان
از نو فلکی دگر چنان ساختمی
کازاده بکام دل رسیدی آسان
ज़माने के चापलूसों की बात न सुन,
नए फ़ैशन वालों से नितरी शराब माँग;
आगे आए हुए एक-एक कर चले गए,
कोई लौटे हुओं का निशान नहीं देता।
مشنو سخن از زمانه ساز آمدگان
می خواه مروق به طراز آمدگان
رفتند یکان یکان فراز آمدگان
کس می ندهد نشان ز بازآمدگان
शराब पीना और भलों के गिर्द घूमना
इससे भला कि किसी ज़ाहिद का ढोंग करना;
अगर आशिक़ और मस्त दोज़ख़ी होंगे,
तो बहिश्त का चेहरा कोई न देखेगा।
می خوردن و گرد نیکوان گردیدن
به زانکه بزرق زاهدی ورزیدن
گر عاشق و مست دوزخی خواهد بود
پس روی بهشت کس نخواهد دیدن
प्रसन्न दिल को ग़म से घिसना ठीक नहीं,
अपने अच्छे वक़्त को दुख के पत्थर पर घिसना ठीक नहीं;
कोई ग़ैब क्या जाने कि क्या होगा,
शराब चाहिए, माशूक़ चाहिए, और मन-भर आराम।
نتوان دل شاد را به غم فرسودن
وقت خوش خود بسنگ محنت سودن
کس غیب چه داند که چه خواهد بودن
می باید و معشوق و به کام آسودن
वह महल जो आसमान से कन्धा भिड़ाता था,
जिसके दर पर शाह चेहरा रखते थे,
हमने उसके कँगूरे पर एक फ़ाख़्ता देखी,
बैठी कह रही थी: कू-कू, कू-कू।
آن قصر که با چرخ همیزد پهلو
بر درگه آن شهان نهادندی رو
دیدیم که بر کنگره‌اش فاخته‌ای
بنشسته همی گفت که کوکوکوکو
हमारे आने और जाने से क्या फ़ायदा,
और हमारी उम्र की आस के तार का बाना कहाँ;
जग की इतनी नाज़ुक जानों के सिर और पैर
जलते हैं और मिट्टी होते हैं — धुआँ कहाँ।
از آمدن و رفتن ما سودی کو
وز تار امید عمر ما پودی کو
چندین سروپای نازنینان جهان
می‌سوزد و خاک می‌شود دودی کو
तन से जब मेरी और तेरी पाक जान गई,
मेरे और तेरे गड्ढे पर दो ईंटें रखेंगे;
और फिर औरों की क़ब्र की ईंट के लिए
किसी साँचे में मेरी और तेरी मिट्टी ढालेंगे।
از تن چو برفت جان پاک من و تو
خشتی دو نهند بر مغاک من و تو
و آنگاه برای خشت گور دگران
در کالبدی کشند خاک من و تو
शराब पी, कि आसमान मेरी और तेरी बरबादी के लिए
मेरी और तेरी पाक जान पर घात लगाए है;
हरियाली पर बैठ और उजली शराब पी,
कि यह हरियाली मेरी और तेरी मिट्टी से बहुत उगेगी।
می‌خور که فلک بهر هلاک من و تو
قصدی دارد بجان پاک من و تو
در سبزه نشین و می روشن میخور
کاین سبزه بسی دمد ز خاک من و تو
शराब के सिवा जो कुछ है, उससे कमी भली,
शराब भी ख़ेमेवाली सुन्दरियों की हथेली से भली;
मस्ती और क़लन्दरी और भटकाव भला,
एक घूँट शराब चाँद से मछली तक भली।
از هر چه بجز می است کوتاهی به
می هم ز کف بتان خرگاهی به
مستی و قلندری و گمراهی به
یک جرعه می ز ماه تا ماهی به
देख, बयार से फूल का दामन चिर गया,
बुलबुल फूल के रूप से उमंग में हुई;
फूल की छाँव में बैठ, कि यह फूल बहुत
मिट्टी में झर जाएगा और हम मिट्टी होंगे।
بنگر ز صبا دامن گل چاک شده
بلبل ز جمال گل طربناک شده
در سایه گل نشین که بسیار این گل
در خاک فرو ریزد و ما خاک شده
कब तक उसका ग़म खाऊँ जो है मेरे पास या नहीं,
और यह उम्र प्रसन्नता से गुज़ारूँ या नहीं;
शराब का क़दह भर, कि मुझे मालूम नहीं
यह दम जो भीतर लूँ, बाहर लूँगा या नहीं।
تا کی غم آن خورم که دارم یا نه
وین عمر به خوشدلی گذارم یا نه
پرکن قدح باده که معلومم نیست
کاین دم که فرو برم برآرم یا نه
एक घूँट पुरानी शराब एक नए राज्य से भली,
और शराब के सिवा हर चीज़ से बाहर निकलना भला;
हाथ में फ़रीदून के तख़्त से सौ गुना भला
ख़म के सिर की ईंट कैख़ुसरो के राज से भली।
یک جرعه می کهن ز ملکی نو به
وز هرچه نه می طریق بیرون شو به
در دست به از تخت فریدون صد بار
خشت سر خم ز ملک کیخسرو به
दुनिया से जितना तू खाए या पहने,
उसकी तलाश में मेहनत करे तो माफ़ी है;
बाक़ी सब मुफ़्त भी क़ीमत नहीं रखता, सावधान,
कि बेशक़ीमती उम्र उसके बदले न बेच।
آن مایه ز دنیا که خوری یا پوشی
معذوری اگر در طلبش میکوشی
باقی همه رایگان نیرزد هشدار
تا عمر گرانبها بدان نفروشی
बहार के आने और सर्दी के जाने से
हमारी हस्ती के पन्ने लपेटे जाते हैं;
शराब पी! ग़म न खा, कि हकीम ने फ़रमाया:
जग के ग़म ज़हर-से हैं और उसका तिर्याक़ शराब।
از آمدن بهار و از رفتن دی
اوراق وجود ما همی گردد طی
می خور! مخور اندوه که فرمود حکیم
غمهای جهان چو زهر و تریاقش می
एक बार मैंने कुम्हार से एक कूज़ा ख़रीदा,
वह कूज़ा हर तरह के राज़ की बात कहने लगा:
मैं एक शाह था जिसका सुनहरा जाम था,
अब हर ख़ुमारी का कूज़ा हो गया हूँ।
از کوزه‌گری کوزه خریدم باری
آن کوزه سخن گفت ز هر اسراری
شاهی بودم که جام زرینم بود
اکنون شده‌ام کوزه هر خماری
ऐ वह जो चार और सात का नतीजा है,
और सात और चार से सदा तपिश में है,
शराब पी, कि मैंने तुझसे हज़ार बार कहा:
तेरा लौटना नहीं, जब गया तो गया।
ای آنکه نتیجهٔ چهار و هفتی
وز هفت و چهار دایم اندر تفتی
می خور که هزار بار بیشت گفتم
باز آمدنت نیست چو رفتی رفتی
ऐ दिल, तू पहेली के रहस्यों तक न पहुँचेगा,
चतुर ज्ञानियों की बारीकी तक न पहुँचेगा;
यहाँ लाल शराब से बहिश्त बना ले,
कि वहाँ जो बहिश्त है, पहुँचे या न पहुँचे।
ایدل تو به اسرار معما نرسی
در نکته زیرکان دانا نرسی
اینجا به می لعل بهشتی می ساز
کانجا که بهشت است رسی یا نرسی
ऐ दोस्त, हक़ीक़त सुन, मुझसे एक बात:
लाल शराब के साथ रह और किसी चाँदी-तन के संग;
कि जिसने जग बनाया, वह बेफ़िक्र है
तुझ-सी मूँछ और मुझ-सी दाढ़ी से।
ای دوست حقیقت شنواز من سخنی
با باده لعل باش و با سیم تنی
کانکس که جهان کرد فراغت دارد
از سبلت چون تویی و ریش چو منی
काश कोई ठहरने की जगह होती,
या इस लम्बी राह का कोई पहुँचना होता;
काश सौ हज़ार साल बाद मिट्टी के दिल से
हरियाली-सी आशा उगने की उम्मीद होती।
ای کاش که جای آرمیدن بودی
یا این ره دور را رسیدن بودی
کاش از پی صد هزار سال از دل خاک
چون سبزه امید بر دمیدن بودی
कल रात मैंने काशी की सुराही पत्थर पर मारी,
मैं मस्त था जो यह अय्याशी की;
सुराही मुझसे हाल की ज़बान में कह रही थी:
मैं तुझ-सी थी, तू भी मुझ-सी होगा।
بر سنگ زدم دوش سبوی کاشی
سرمست بدم که کردم این عیاشی
با من به زبان حال می‌گفت سبو
من چون تو بدم تو نیز چون من باشی
अगर आशा की शाख़ पर मैं फल पाता,
अपने ही धागे का एक सिरा पाता;
कब तक अस्तित्व के तंग क़ैदख़ाने से —
काश अनहोनी की ओर एक दर पाता।
بر شاخ امید اگر بری یافتمی
هم رشته خویش را سری یافتمی
تا چند ز تنگنای زندان وجود
ای کاش سوی عدم دری یافتمی
प्याला और सुराही उठा, ऐ दिलजू,
खेत और नदी के किनारे बेफ़िक्र बैठ;
कितने ही अज़ीज़ों को इस बुरे स्वभाव के चरख़ ने
सौ बार प्याला और सौ बार सुराही बनाया।
بر گیر پیاله و سبو ای دلجوی
فارغ بنشین بکشتزار و لب جوی
بس شخص عزیز را که چرخ بدخوی
صد بار پیاله کرد و صد بار سبوی
मैंने एक बूढ़े को शराबख़ाने में देखा,
मैंने कहा गए हुओं की कोई ख़बर न दोगे;
उसने कहा शराब पी, कि हम-से बहुत
गए और कोई ख़बर लौटकर न आई।
پیری دیدم به خانهٔ خماری
گفتم نکنی ز رفتگان اخباری
گفتا می خور که همچو ما بسیاری
رفتند و خبر باز نیامد باری
कब तक पाँच और चार की बात, ऐ साक़ी,
मुश्किल क्या एक क्या सौ हज़ार, ऐ साक़ी;
हम सब मिट्टी हैं, चंग सँवार, ऐ साक़ी,
हम सब हवा हैं, शराब ला, ऐ साक़ी।
تا چند حدیث پنج و چار ای ساقی
مشکل چه یکی چه صد هزار ای ساقی
خاکیم همه چنگ بساز ای ساقی
بادیم همه باده بیار ای ساقی
जितना मैं हर ओर नज़र करता हूँ,
बाग़ में कौसर की एक नदी बह रही है;
मैदान बहिश्त-सा है, कौसर की कम बात कर,
बहिश्त में किसी बहिश्ती चेहरे के संग बैठ।
چندان که نگاه می‌کنم هر سویی
در باغ روان است ز کوثر جویی
صحرا چو بهشت است ز کوثر کم گوی
بنشین به بهشت با بهشتی رویی
प्रसन्न रह, कि कल तेरी सुध पका दी गई,
कल तेरी चाह से बेफ़िक्र हो गए;
क्या कहानी कहूँ, कि कल तेरी माँग पर
कल ही तेरे कल के काम का फ़ैसला दे दिया।
خوش باش که پخته‌اند سودای تو دی
فارغ شده‌اند از تمنای تو دی
قصه چه کنم که به تقاضای تو دی
دادند قرار کار فردای تو دی
कुम्हार की कार्यशाला में मैंने विचार किया,
चरख़ के पाये पर उस्ताद को खड़ा देखा;
वह बेधड़क कूज़े को दस्ता और सिर बना रहा था
शाह की खोपड़ी से और भिखारी के हाथ से।
در کارگه کوزه‌گری کردم رای
در پایه چرخ دیدم استاد بپای
میکرد دلیر کوزه را دسته و سر
از کله پادشاه و از دست گدای
मेरे दिल के कान में आसमान ने छिपकर कहा:
जो हुक्म क़ज़ा से हुआ, उसे तू मुझसे जानता है;
अपनी गर्दिश में अगर मेरा बस चलता,
मैं ख़ुद को इस घबराहट से छुड़ा लेता।
در گوش دلم گفت فلک پنهانی
حکمی که قضا بود ز من میدانی
در گردش خویش اگر مرا دست بدی
خود را برهاندمی ز سرگردانی
उस शराब के कूज़े से जिसमें कोई नुक़सान नहीं,
एक क़दह भर, पी और मुझे एक और दे;
इससे पहले, ऐ सनम, कि किसी रस्ते पर
मेरी और तेरी मिट्टी को कुम्हार कूज़ा बना दे।
زان کوزهٔ می که نیست در وی ضرری
پر کن قدحی بخور بمن ده دگری
زان پیشتر ای صنم که در رهگذری
خاک من و تو کوزه‌کند کوزه‌گری
अगर मेरा आना मेरे बस में होता, मैं न आता,
और जाना भी मेरे बस में होता, तो कब जाता;
इससे भला न होता कि इस उजड़े सराय में
न आता, न जाता, न होता।
گر آمدنم بخود بدی نامدمی
ور نیز شدن بمن بدی کی شدمی
به زان نبدی که اندر این دیر خراب
نه آمدمی نه شدمی نه بدمی
अगर गेहूँ के मग़ज़ की एक रोटी मिल जाए,
और दो-मन शराब, किसी भेड़ की एक रान,
किसी लालेरुख़ के साथ और बाग़ के एक कोने में,
वह ऐश हो जो हर सुलतान की हद में नहीं।
گر دست دهد ز مغز گندم نانی
وز می دو منی ز گوسفندی رانی
با لاله رخی و گوشه بستانی
عیشی بود آن نه حد هر سلطانی
अगर चरख़ का काम इनसाफ़ से तौला होता,
चरख़ का सारा हाल पसन्दीदा होता;
और अगर चरख़ के कामों में इनसाफ़ होता,
गुणी लोगों का दिल कब दुखता।
گر کار فلک به عدل سنجیده بدی
احوال فلک جمله پسندیده بدی
ور عدل بدی بکارها در گردون
کی خاطر اهل فضل رنجیده بدی
सावधान, ऐ कुम्हार, अगर होश में है, रुक,
कब तक मिट्टी के लोगों पर ज़ुल्म करेगा;
फ़रीदून की उँगली और कैख़ुसरो की हथेली
तूने चाक पर रख दी है — तू क्या समझता है।
هان کوزه‌گرا بپای اگر هشیاری
تا چند کنی بر گل مردم خواری
انگشت فریدون و کف کیخسرو
بر چرخ نهاده‌ای چه می‌پنداری
सुबह की शराब के वक़्त, ऐ शुभ-क़दम सनम,
एक तराना बना और शराब आगे ला;
कि इस तीरमाह के आने और दी के जाने ने
मिट्टी में सौ हज़ार जम और कै फेंके।
هنگام صبوح ای صنم فرخ پی
برساز ترانه‌ای و پیش‌آور می
کافکند بخاک صد هزاران جم و کی
این آمدن تیرمه و رفتن دی

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