रुबाइयात
رباعیات
प्रस्तावना
उमर ख़य्याम (१०४८–११३१) निशापुर के गणितज्ञ, खगोलशास्त्री और दार्शनिक थे — अपने युग में एक बीजगणितज्ञ और पंचांग-सुधारक के रूप में विख्यात, न कि कवि के रूप में। रुबाई — चार मिसरों की वह कविता जो पहली दो पंक्तियों में दृश्य या तर्क रखती है, तीसरी में मुड़ती है, और चौथी में सूत्र-सी चोट के साथ उतरती है — उनके नाम से सदियों तक इकट्ठा होती रही, अक्सर अनिश्चित श्रेय के साथ। यह संस्करण फ़ोरूग़ी–ग़नी (तेहरान, १९४२) के १७८ रुबाइयों का है, जो फ़ारसी मूल से सीधा अनूदित है।
एडवर्ड फ़िट्ज़जेरल्ड का प्रसिद्ध अंग्रेज़ी ’रुबाइयात’ (१८५९) एक विक्टोरियन पुनर्रचना है, अनुवाद नहीं — उसने कई अलग रुबाइयों को एक सतत कविता में ढाला और अपनी तुकबन्दी व कल्पनाएँ जोड़ीं। यहाँ का प्रयास उलटा है: हर रुबाई को फ़ारसी में जो कहती है, वैसा ही, मिसरा-दर-मिसरा देना — बिना विलय, बिना भराव, बिना उस मशहूर तुक की नक़ल के। जहाँ फ़िट्ज़जेरल्ड की पंक्तियाँ मुहावरे बन गईं, वहाँ मूल फ़ारसी का अर्थ ही दिया गया है।
ख़य्याम की आवाज़ एक ज्यामितिज्ञ की-सी है जो मृत्यु पर बात कर रहा हो: ठोस संज्ञाएँ (कूज़ा, मिट्टी, लाला, मयख़ाना, सराय), सादा वाक्य-रचना, और तार्किक जोड़ (चूँकि, इससे पहले कि, अगर) एक शान्त पर विदारक तर्क को आगे बढ़ाते हैं। स्वर शुष्क, सन्देहशील, कोमल है — कभी रहस्यवादी धुंध नहीं, कभी विलापी नहीं। बार-बार लौटने वाले चित्र हैं: घूमता आसमान (चरख़, फ़लक) नियति के रूप में; धूल-से-मिट्टी-से-घड़े-से-धूल का चक्र, जिसमें बादशाहों की मिट्टी से कूज़े बनते हैं; और एक ही टेक — प्रसन्न रह, इस साँस को पी लो, क्योंकि कल की ज़मानत कोई नहीं देता।
पाठक को यह भी देखना चाहिए कि क़ुरआन, बहिश्त की हूरों, बहत्तर मिल्लतों, मस्जिद और मन्दिर को छूती रुबाइयों में जो बेबाकी है, वह मूल की है — उसे नरम करना बेवफ़ाई होगी, और उसमें कुछ जोड़ना भी। यहाँ बुद्धि तीखी है, पर चीख़ती नहीं। कई रुबाइयाँ अन्य कवियों के नाम से भी मिलती हैं; यह सन्देह अनुवाद के शरीर में नहीं, अपितु उपकरण-सामग्री में दर्ज है।
अपने ही रूप से हमारी मुश्किल हल कर;
एक कूज़ा शराब, कि हम साथ पी लें,
इससे पहले कि हमारी मिट्टी से कूज़े बनें।
حل کن به جمال خویشتن مشکل ما
یک کوزه شراب تا به هم نوش کنیم
زآن پیش که کوزهها کنند از گل ما
इस उदास दिल को अभी प्रसन्न रख;
चाँदनी में शराब पी, ऐ चाँद, क्योंकि चाँद
बहुत चमकेगा और हमें न पाएगा।
حالی خوش دار این دل پرسودا را
می نوش به ماهتاب ای ماه که ماه
بسیار بتابد و نیابد ما را
उसे कभी-कभी पढ़ते हैं, हमेशा नहीं;
पर प्याले की गोलाई पर एक आयत स्थायी बसी है,
जिसे हर जगह सदा पढ़ते हैं।
گهگاه نه بر دوام خوانند آن را
بر گرد پیاله آیتی هست مقیم
کاندر همه جا مدام خوانند آن را
छल और धोखे की बुनियाद न रख;
तू इस पर घमंड न कर कि तू शराब नहीं पीता,
सौ ऐसे कौर खाता है जिनका शराब ग़ुलाम है।
بنیاد مکن تو حیله و دستان را
تو غره بدان مشو که می مینخوری
صد لقمه خوری که می غلام است آن را
लाले-सा चेहरा और सर्व-सा क़द मुझमें है,
यह न जाना कि इस मिट्टी के आनन्दगृह में
अनादि के चित्रकार ने किसलिए मुझे सजाया।
چون لاله رخ و چو سرو بالاست مرا
معلوم نشد که در طربخانۀ خاک
نقاش ازل بهر چه آراست مرا
जान और दिल और जाम और शराब से भीगे वस्त्र;
न रहमत की आस, न अज़ाब का डर,
मिट्टी, हवा, आग और पानी से आज़ाद।
جان و دل و جام و جامه پر درد شراب
فارغ ز امید رحمت و بیم عذاب
آزاد ز خاک و باد و از آتش و آب
गुलाबी शराब के बिना जीना नहीं चाहिए;
यह हरियाली जो आज हमारा तमाशागाह है,
जब हमारी मिट्टी की हरियाली होगी, वह किसका तमाशागाह होगी।
بی بادهٔ گلرنگ نمیباید زیست
این سبزه که امروز تماشاگه ماست
تا سبزهٔ خاک ما تماشاگه کیست
तेरा हाथ शराब के जाम से क्यों ख़ाली है;
शराब पी, कि ज़माना दग़ाबाज़ दुश्मन है,
ऐसा दिन फिर पाना दुश्वार है।
دست تو ز جام می چرا بیکار است
می خور که زمانه دشمنی غدار است
دریافتن روز چنین دشوار است
और कल की चिन्ता सिवा वहम के कुछ नहीं;
इस दम को बरबाद न कर अगर तेरा दिल पागल नहीं,
कि इस बची उम्र का कोई मोल नहीं दिखता।
واندیشهٔ فردات به جز سودا نیست
ضایع مکن این دم ار دلت شیدا نیست
کاین باقی عمر را بها پیدا نیست
पाँच और चार और छह और सात में हैरान हुए,
शराब पी, तू नहीं जानता कहाँ से आया है,
प्रसन्न रह, तू नहीं जानता कहाँ जाएगा।
حیران شده در پنج و چهار و شش و هفت
می نوش ندانی ز کجا آمدهای
خوش باش ندانی به کجا خواهی رفت
अन्याय तेरी पुरानी रीत है;
ऐ मिट्टी, अगर तेरा सीना चीर दें,
कितने ही बेशक़ीमती जौहर तेरे सीने में हैं।
بیدادگری شیوهٔ دیرینهٔ توست
ای خاک اگر سینه تو بشکافند
بس گوهر قیمتی که در سینهٔ توست
अचानक तेरी पाक जान तन से निकल जाएगी;
हरियाली पर बैठ और कुछ दिन ख़ुश जी,
इससे पहले कि तेरी मिट्टी से हरियाली उगे।
ناگه برود ز تن روان پاکت
بر سبزه نشین و خوش بزی روزی چند
زآن پیش که سبزه بر دمد از خاکت
कोई नहीं जिसने सत्य के इस मोती को बेधा हो;
हर किसी ने अपने वहम से कुछ कहा,
जो असल में है, उसे कोई कह नहीं सका।
کس نیست که این گوهر تحقیق بسفت
هر کس سخنی از سر سودا گفتند
زآن روی که هست کس نمیداند گفت
किसी सुन्दरी की ज़ुल्फ़ की क़ैद में था;
यह दस्ता जो तू उसकी गर्दन पर देखता है,
वह हाथ है जो किसी यार की गर्दन पर था।
در بند سر زلف نگاری بودهست
این دسته که بر گردن او میبینی
دستیست که بر گردن یاری بودهست
किसी शाह की आँख और वज़ीर के दिल से बना;
हर शराब का कटोरा जो किसी मतवाले की हथेली पर है,
किसी मस्त के गाल और किसी छिपी हुई की होंठ से है।
از دیدهٔ شاهی و دل دستوریست
هر کاسهٔ می که بر کف مخموریست
از عارض مستی و لب مستوریست
जैसे नदी में पानी और मैदान में हवा;
मुझे कभी दो दिनों का ग़म याद नहीं आया —
वह दिन जो नहीं आया और वह दिन जो गुज़र गया।
چون آب به جویبار و چون باد به دشت
هرگز غم دو روز مرا یاد نگشت
روزی که نیامدهست و روزی که گذشت
चमन के आँगन में दिलकश चेहरा भला है;
बीते कल का जो कुछ कहे भला नहीं,
प्रसन्न रह और कल की बात न कर, कि आज भला है।
در صحن چمن روی دلافروز خوش است
از دی که گذشت هر چه گویی خوش نیست
خوش باش و ز دی مگو که امروز خوش است
घूमता आसमान भी काम पर था;
जहाँ कहीं तू ज़मीन पर क़दम रखे,
वह किसी सुन्दरी की आँख की पुतली थी।
گردنده فلک نیز بکاری بوده است
هرجا که قدم نهی تو بر روی زمین
آن مردمک چشم نگاری بودهست
मैं मन्दिर के बुतपरस्तों से बेज़ार हो गया;
ख़य्याम, किसने कहा कि दोज़ख़ी होगा,
कौन दोज़ख़ गया और कौन बहिश्त से आया।
بیزار شدم ز بتپرستان کنشت
خیام ، که گفت دوزخی خواهد بود
که رفت به دوزخ و که آمد ز بهشت
उसे तोड़ना कोई मतवाला रवा नहीं समझता;
इतने नाज़ुक सिर और पैर, सिर और हाथ —
किसकी मुहब्बत से जुड़े और किसके कीने से टूटे।
بشکستن آن روا نمیدارد مست
چندین سر و پای نازنین از سر و دست
از مهر که پیوست و به کین که شکست
जा, ख़ुश जी, भले ही तुझ पर ज़ुल्म है;
अक़्लमंदों के साथ रह, कि तेरे तन की जड़
थोड़ी धूल, बयार, ग़ुबार और एक साँस है।
رو شاد بزی اگرچه بر تو ستمیست
با اهل خرد باش که اصل تن تو
گردی و نسیمی و غباری و دمیست
उठ और जाम-ए-शराब से पक्का इरादा कर,
कि यह हरियाली जो आज तेरा तमाशागाह है,
कल सारी तेरी मिट्टी से ही उगेगी।
برخیز و به جام باده کن عزم درست
کاین سبزه که امروز تماشاگه توست
فردا همه از خاک تو برخواهد رست
फूल का चेहरा और शराब का जाम हँसते पाए,
हाल की ज़बान में मेरे कान में आकर बोला:
समझ ले, बीती उम्र फिर नहीं पाई जाती।
روی گل و جام باده را خندان یافت
آمد به زبان حال در گوشم گفت
دریاب که عمر رفته را نتوان یافت
तू आसमान को सात गिन या आठ;
जब मरना है और सारी आरज़ुएँ छोड़नी हैं,
चींटी क़ब्र में खाए या भेड़िया मैदान में — क्या फ़र्क़।
خواهی تو فلک هفت شمر خواهی هشت
چون باید مرد و آرزوها همه هشت
چه مور خورد به گور و چه گرگ به دشت
किसी लालेरुख़ के साथ अगर तुझे फ़ुरसत है;
आनन्द से शराब पी, कि यह पुराना चरख़
अचानक तुझे मिट्टी-सा नीचा कर देगा।
با لالهرخی اگر تو را فرصت هست
می نوش به خرمی که این چرخ کهن
ناگاه تو را چو خاک گرداند پست
शक की उम्मीद पर सारी उम्र बैठा नहीं जा सकता;
सावधान, कि शराब का जाम हथेली से न रखें,
बेख़बरी में आदमी क्या होश में क्या मस्त।
نتوان به امید شک همه عمر نشست
هان تا ننهیم جام می از کف دست
در بیخبری مرد چه هشیار و چه مست
चूँकि जो कुछ है, उस हर चीज़ में कमी और टूट है;
मान ले कि जो कुछ जग में है वह नहीं है,
समझ ले कि जो कुछ जग में नहीं वह है।
چون هست به هرچه هست نقصان و شکست
انگار که هرچه هست در عالم نیست
پندار که هرچه نیست در عالم هست
किसी सनम की हथेली और किसी प्रिया का चेहरा है;
हर ईंट जो किसी ऐवान के कँगूरे पर है,
किसी वज़ीर की उँगली या किसी सुलतान का सिर है।
کفّ صنمیّ و چهرهٔ جانانیست
هر خشت که بر کنگرهٔ ایوانیست
انگشت وزیر یا سر سلطانیست
तो किसलिए उसे कमी और घटी में डाला;
अगर अच्छा बना तो तोड़ना किसलिए,
और अगर अच्छा न बना तो इन रूपों का दोष किसका।
از بهر چه اوفکندش اندر کم و کاست
گر نیک آمد شکستن از بهر چه بود
ور نیک نیامد این صور عیب که راست
इस बनावट से किसी की जान वाक़िफ़ नहीं;
मिट्टी के दिल के सिवा कोई मंज़िल नहीं,
शराब पी, कि ऐसी कहानियाँ छोटी नहीं।
زین تعبیه جان هیچکس آگه نیست
جز در دل خاک هیچ منزلگه نیست
می خور که چنین فسانهها کوته نیست
नींद से किसी का ख़ुशी का फूल नहीं खिला;
ऐसा काम क्या करता है जो मौत का जोड़ है?
शराब पी, कि मिट्टी के नीचे सोना ही है।
کز خواب کسی را گل شادی نشکفت
کاری چه کنی که با اجل باشد جفت؟
می خور که به زیر خاک میباید خفت
न उसका आदि, न उसका अन्त दिखता है;
कोई इस बात में एक दम भी सच नहीं कहता,
कि यह आना कहाँ से और जाना कहाँ है।
او را نه بدایت نه نهایت پیداست
کس مینزند دمی در این معنی راست
کاین آمدن از کجا و رفتن به کجاست
खेत के किनारे एक साग़र शराब मुझे दे,
भले ही आम लोगों के नज़दीक यह बुरा हो,
मैं कुत्ते से बदतर हूँ अगर बहिश्त का नाम लूँ।
یک ساغر می دهد مرا بر لب کشت
هر چند به نزد عامه این باشد زشت
سگ به ز من است اگر برم نام بهشت
फ़ना के रहस्यों के परदे में चला जाएगा;
शराब पी, तू नहीं जानता कहाँ से आया है,
प्रसन्न रह, तू नहीं जानता कहाँ जाएगा।
در پردۀ اسرار فنا خواهی رفت
می نوش ندانی از کجا آمدهای
خوش باش ندانی به کجا خواهی رفت
समझ ले कि हफ़्ते भर में मिट्टी हो जाएगी;
शराब पी और एक फूल चुन ले, कि जब तू देखे,
फूल मिट्टी हो गया और हरियाली कूड़ा।
دریاب که هفته دگر خاک شدهست
می نوش و گلی بچین که تا درنگری
گل خاک شدهست و سبزه خاشاک شدهست
दुख सब बढ़े हुए और राहत घटी हुई;
ईश्वर का शुक्र, कि जो कुछ बला के सामान हैं,
हमें किसी और से माँगना नहीं पड़ता।
محنت همه افزوده و راحت کم و کاست
شکر ایزد را که آنچه اسباب بلاست
ما را ز کس دگر نمیباید خواست
एक-दो-तीन साथियों और किसी हूर-सी गुड़िया के संग;
क़दह आगे रख, कि सुबह की शराब पीने वाले
मस्जिद से बेफ़िक्र हैं और मन्दिर से आज़ाद।
با یک دو سه اهل و لعبتی حورسرشت
پیش آر قدح که بادهنوشان صبوح
آسوده ز مسجدند و فارغ ز کنشت
और अगर तेरे तन पर उम्र चुस्त वस्त्र हो,
इस तन के ख़ेमे में जो तेरी छतरी है,
सावधान, टेक न लगा, कि उसकी चार कीलें ढीली हैं।
ور بر تن تو عمر لباسی چستست
در خیمه تن که سایبانیست ترا
هان تکیه مکن که چارمیخش سستست
मैं कहता हूँ कि अंगूर का पानी भला है;
यह नक़द ले और उस उधार से हाथ खींच,
कि ढोल की आवाज़ दूर से सुनना भला है।
من میگویم که آب انگور خوش است
این نقد بگیر و دست از آن نسیه بدار
کآواز دهل شنیدن از دور خوش است
यह बात झूठी है, दिल उस पर न लगाया जाए;
अगर आशिक़ और शराबी दोज़ख़ में होंगे,
तो कल बहिश्त हथेली-सी ख़ाली देखेगा।
قولیست خلاف ، دل در آن نتوان بست
گر عاشق و میخواره به دوزخ باشند
فردا بینی بهشت همچون کف دست
उसने मुझे बहिश्ती बनाया या भद्दा दोज़ख़ी;
एक जाम, एक सनम और एक बरबत खेत के किनारे —
ये तीनों मुझे नक़द, और तुझे बहिश्त उधार।
از اهل بهشت کرد یا دوزخ زشت
جامی و بتی و بربطی بر لب کشت
این هرسه مرا نقد و تو را نسیه بهشت
शराब पी, इससे बेहतर एक दम नहीं मिलता;
प्रसन्न रह और सोच मत, कि चाँदनी बहुत बार
हमारी मिट्टी के सिर पर एक-एक कर चमकेगी।
می نوش دمی بهتر از این نتوان یافت
خوش باش و میندیش که مهتاب بسی
اندر سر خاک یک به یک خواهد تافت
कुफ़्र और दीन से बेफ़िक्र रहना मेरा दीन है;
मैंने ज़माने की दुल्हन से पूछा तेरा महर क्या है,
उसने कहा तेरा प्रसन्न दिल मेरा महर है।
فارغ بودن ز کفر و دین دین من است
گفتم به عروس دهر کابین تو چیست
گفتا دل خرم تو کابین من است
प्याला जिस्म है और उसकी शराब जान है;
वह बिल्लौरी जाम जो शराब से हँसता है,
एक आँसू है जिसमें दिल का ख़ून छिपा है।
جسم است پیاله و شرابش جان است
آن جام بلورین که ز می خندان است
اشکی است که خون دل در او پنهان است
जवानी के दौर से तेरा हासिल यही है;
फूल, शराब और मतवाले दोस्तों का वक़्त —
एक दम प्रसन्न रह, कि ज़िन्दगी यही है।
خود حاصلت از دور جوانی این است
هنگام گل و باده و یاران سرمست
خوش باش دمی که زندگانی این است
ख़ुशी और ग़म जो क़ज़ा और क़दर में है,
इसे चरख़ पर मत टाल, कि अक़्ल की राह में
चरख़ तुझसे हज़ार गुना बेचारा है।
شادی و غمی که در قضا و قدر است
با چرخ مکن حواله کاندر ره عقل
چرخ از تو هزار بار بیچارهتر است
किसी शहरयार के ख़ून की लाली से था;
बैंगनी की हर शाख़ जो ज़मीन से उगती है,
वह तिल है जो किसी सुन्दरी के गाल पर था।
از سرخی خون شهریاری بودهست
هر شاخ بنفشه کز زمین میروید
خالیست که بر رخ نگاری بودهست
मुझसे और तुझसे पहले कोई ताज और नगीना था;
किसी नाज़ुक चेहरे की धूल आदर से झाड़,
कि वह भी किसी सुन्दर नाज़ुक का चेहरा था।
پیش از من و تو تاج و نگینی بودهست
گرد از رخ نازنین به آزرم فشان
کآن هم رخ خوب نازنینی بودهست
मानो किसी फ़रिश्ता-स्वभाव के होंठ से उगी है;
हरियाली पर पाँव हिक़ारत से न रख,
कि वह हरियाली किसी लालेरुख़ की मिट्टी से उगी है।
گویی ز لب فرشتهخویی رستهست
پا بر سر سبزه تا به خواری ننهی
کآن سبزه ز خاک لالهرویی رستهست
अपने कमाल में साथियों की महफ़िल के दीपक बने,
इस अँधेरी रात से बाहर राह न पाई,
एक कहानी कही और नींद में चले गए।
در جمع کمال شمع اصحاب شدند
ره زین شب تاریک نبردند برون
گفتند فسانهای و در خواب شدند
उनके बिना सारे काम निपटा दिए गए;
आज एक बहाना गढ़ दिया,
कल वही होगा जो पहले से रच रखा था।
بی او همه کارها بپرداختهاند
امروز بهانهای درانداختهاند
فردا همه آن بود که درساختهاند
हर कोई अपनी मुराद की ओर एक दौड़ दौड़ता है;
यह पुराना जग किसी के लिए बाक़ी नहीं रहता,
वे गए और हम जाएँगे, और आएँगे और जाएँगे।
هر کس به مراد خویش یک تک به دوند
این کهنهجهان به کس نماند باقی
رفتند و رویم دیگر آیند و روند
कितने ही दाग़ उसने ग़मगीन दिल पर रखे;
लाल-सी बहुत होंठ और कस्तूरी-सी ज़ुल्फ़ें
उसने ज़मीन के ढोल और मिट्टी की डिबिया में रख दीं।
بس داغ که او بر دل غمناک نهاد
بسیار لب چو لعل و زلفین چو مشک
در طبل زمین و حقهٔ خاک نهاد
किसी पर भी राज़ नहीं खोलते;
हमें क़ज़ा इससे ज़्यादा नहीं दिखाती,
यह हमारी उम्र का पैमाना है, जिसे नाप रहे हैं।
بر هیچکسی راز همینگشایند
ما را ز قضا جز این قدر ننمایند
پیمانهٔ عمر ماست میپیمایند
अक़्लमंदों के असमंजस के कारण हैं;
सावधान, अक़्ल का सिरा गुम न कर,
कि जो शासक हैं वे ही घबराए फिरते हैं।
اسباب تردد خردمنداناند
هان تا سر رشتهٔ خرد گم نکنی
کآنان که مدبرند سرگرداناند
मेरे जाने से उसका वैभव और मान न बढ़ा;
और किसी से भी मेरे दो कानों ने न सुना
कि यह मेरा आना और जाना किसलिए था।
وز رفتن من جلال و جاهش نفزود
وز هیچ کسی نیز دو گوشم نشنود
کاین آمدن و رفتنم از بهر چه بود
बूँद जब सीप की क़ैद सहती है तो मोती बनती है;
अगर धन न रहे, सिर जगह पर बना रहे,
पैमाना जब ख़ाली हो तो फिर भर जाता है।
قطره چو کشد حبس صدف در گردد
گر مال نماند سر بماناد به جای
پیمانه چو شد تهی دگر پر گردد
और मौत के हाथों बहुत जिगर ख़ून हुए;
कोई उस जहान से न आया कि मैं उससे पूछूँ
कि दुनिया के मुसाफ़िरों का हाल क्या हुआ।
وز دست اجل بسی جگرها خون شد
کس نآمد از آن جهان که پرسم از وی
کاحوال مسافران دنیا چون شد
और वह ताज़ा बहार-सी ज़िन्दगी बीत गई;
आनन्द का वह पंछी जिसका नाम शबाब था,
अफ़सोस, न जाना कब आया, कब गया।
و آن تازه بهار زندگانی دی شد
آن مرغ طرب که نام او بود شباب
افسوس ندانم که کی آمد کی شد
न हमारा नाम, न कोई निशान होगा;
इससे पहले हम न थे और कोई कमी न थी,
इसके बाद जब न होंगे, वैसा ही होगा।
نی نام ز ما و نی نشان خواهد بود
زین پیش نبودیم و نبد هیچ خلل
زین پس چو نباشیم همان خواهد بود
दिन में सौ बार ख़ुद तुझसे कहती है:
इस एक दम, अपने वक़्त को समझ ले, कि तू
वह साग नहीं जिसे काटें और फिर उगे।
روزی صد بار خود تو را میگوید
دریاب تو این یک دم وقتت که نهای
آن تره که بدروند و دیگر روید
उस दम को समझ ले जो उमंग के साथ गुज़रता है;
साक़ी, साथियों के कल का ग़म क्यों खाता है,
प्याला आगे ला, कि रात गुज़रती है।
دریاب دمی که با طرب میگذرد
ساقی غم فردای حریفان چه خوری
پیش آر پیاله را که شب میگذرد
और मुझसे सारा काम बेढंगा हो रहा है;
जान ने कूच का इरादा किया, मैंने कहा मत जा,
उसने कहा क्या करूँ, घर गिर रहा है।
وز من همه کار نانکو میآید
جان عزم رحیل کرد و گفتم بمرو
گفتا چه کنم خانه فرومیآید
और आदमी खाने से ज़मीन तृप्त न हुई;
तू इस पर घमंड मत कर कि उसने तुझे नहीं खाया,
जल्दी मत कर, वह खा लेगी, देर तो नहीं हुई।
وز خوردن آدمی زمین سیر نشد
مغرور بدانی که نخوردهست تو را
تعجیل مکن هم بخورد دیر نشد
उधर न झुक, कि अक़्लमंद नहीं झुकते;
तेरे जैसे बहुत जाते हैं और बहुत आते हैं,
अपना हिस्सा झपट ले, इससे पहले कि तुझे झपट लें।
مگرای بدان که عاقلان نگرایند
بسیار چو تو روند و بسیار آیند
بربای نصیب خویش کت بربایند
तो उसका भला-बुरा मुझसे क्यों जोड़ते हैं;
कल मेरे बिना, आज कल-सा मेरे और तेरे बिना,
कल किस दलील पर मुझे न्यायी के सामने बुलाएँगे।
پس نیک و بدش ز من چرا میدانند
دی بی من و امروز چو دی بی من و تو
فردا به چه حجتم به داور خوانند
कब तक हर बुरे-भले के पीछे रहेगा;
अगर तू ज़मज़म का चश्मा हो या आब-ए-हयात,
आख़िर मिट्टी के दिल में उतर जाएगा।
چند از پی هر زشت و نکو خواهی شد
گر چشمهٔ زمزمی و گر آب حیات
آخر به دل خاک فروخواهی شد
जब तक चेहरा दिल के ख़ून से न धोए, कुछ नहीं होता;
वहम क्या पकाता है, जब तक दिल जलों की तरह
आज़ाद होकर अपना त्याग न कहे, कुछ नहीं होता।
رخساره بخون دل نشویی نشود
سودا چه پزی تا که چو دلسوختگان
آزاد به ترک خود نگویی نشود
शुद्ध शराब से बेहतर किसी ने कुछ न देखा;
मैं शराब बेचने वालों पर हैरान हूँ, कि वे
इससे बेहतर जो बेचें, क्या ख़रीदना चाहेंगे।
بهتر ز می ناب کسی هیچ ندید
من در عجبم ز میفروشان کایشان
به زآنکه فروشند چه خواهند خرید
दिल को घटी-बढ़ी से उदास करना ठीक नहीं;
मेरा और तेरा काम मेरी और तेरी राय पर नहीं,
मोम को भी अपने हाथ से नहीं गढ़ सकते।
دل را به کم و بیش دژم نتوان کرد
کار من و تو چنانکه رای من و توست
از موم به دست خویش هم نتوان کرد
वही सदा दुश्मन का काम भी बनाता है;
कहते हैं सुराही बनाने वाला मुसलमान न था,
तू उसे क्या कहेगा जो लौकी गढ़ता है।
همواره همو کار عدو میسازد
گویند قرابهگر مسلمان نبود
او را تو چه گویی که کدو میسازد
हुक्म दे, ऐ सनम, कि शराब नाप-भर दें;
हूर और महलों से, बहिश्त और दोज़ख़ से
बेफ़िक्र बैठ, कि वह सब बस अफ़वाह है।
فرمای بتا که می بهاندازه دهند
از حور و قصور و ز بهشت و دوزخ
فارغ بنشین که آن هر آوازه دهند
और बैठने को कोई घोंसला है,
न किसी का सेवक, न किसी का स्वामी है,
कह, ख़ुश जी, कि उसका जहान भला है।
از بهر نشست آشیانی دارد
نه خادم کس بود نه مخدوم کسی
گو شاد بزی که خوشجهانی دارد
बेकार ग़म खाना कोई फ़ायदा नहीं देता;
क़दह शराब से भर और मेरी हथेली में जल्दी रख,
कि मैं फिर पी लूँ, कि जो होना था सब हुआ।
غم خوردن بیهوده نمیدارد سود
پر کن قدح می به کفم درنه زود
تا باز خورم که بودنیها همه بود
बादल फूलों के बाग़ के चेहरे से धूल धो रहा है;
बुलबुल अपने हाल की ज़बान में पीले फूल से
पुकार रही है कि शराब पीनी चाहिए।
ابر از رخ گلزار همیشوید گرد
بلبل به زبان حال خود با گل زرد
فریاد همیکند که می باید خورد
हुक्म दे कि गुलाबी शराब लाएँ;
तू सोना नहीं, ऐ ग़ाफ़िल नादान, कि तुझे
मिट्टी में रखें और फिर बाहर निकालें।
فرمای که تا بادهٔ گلگون آرند
تو زر نهای ای غافل نادان که تو را
در خاک نهند و باز بیرون آرند
या न होने और होने के पीछे गुज़रेगी;
शराब पी, कि वह उम्र जिसके पीछे मौत है,
वही भली जो नींद में या मस्ती में गुज़रे।
یا در پی نیستی و هستی گذرد
می نوش که عمری که اجل در پی اوست
آن به که به خواب یا به مستی گذرد
किसी ने दायरे से एक क़दम बाहर न रखा;
मैं देखता हूँ, नौसिखिए से उस्ताद तक,
जो भी माँ से जन्मा, उसके हाथ में बेबसी है।
کس یک قدم از دایره بیرون ننهاد
من مینگرم ز مبتدی تا استاد
عجز است به دست هرکه از مادر زاد
ज़माने के भले-बुरे से नाता तोड़;
शराब हाथ में और किसी दिलबर की ज़ुल्फ़ थाम, कि जल्दी
यह भी गुज़र जाएगा और ये कुछ दिन न रहेंगे।
از نیک و بد زمانه بگسل پیوند
می در کف و زلف دلبری گیر که زود
هم بگذرد و نماند این روزی چند
तेरे ऐश और उमंग का सिर ऊँचा है;
दोनों पर टेक न लगा, कि आसमान का दौर
परदे में हज़ार तरह के खेल रचता है।
عیش و طرب تو سرفرازی دارد
بر هر دو مکن تکیه که دوران فلک
در پرده هزار گونه بازی دارد
कि उसे तोड़कर फिर ज़मीन को न सौंप दे;
अगर बादल पानी की तरह मिट्टी को उठा ले,
क़यामत तक अज़ीज़ों का ख़ून बरसाए।
کش نشکند و هم به زمین نسپارد
گر ابر چو آب خاک را بردارد
تا حشر همه خون عزیزان بارد
उसे प्रसन्नता के सिवा न गुज़रने दे;
सावधान, कि जग के सौदे की पूँजी
उम्र है, जैसा तू उसे गुज़ारे वैसा गुज़रती है।
مگذار که جز به شادمانی گذرد
هشدار که سرمایهٔ سودای جهان
عمر است چنان کش گذرانی گذرد
वहाँ शराब और दूध और शहद होगा;
अगर हमने शराब और माशूक़ चुना तो क्या डर,
जब आख़िर काम का अंजाम ऐसा ही होगा।
آنجا می و شیر و انگبین خواهد بود
گر ما می و معشوق گزیدیم چه باک
چون عاقبت کار چنین خواهد بود
शराब, दूध, शहद और शक्कर की नदी होगी;
क़दह शराब से भर और मेरी हथेली पर रख,
एक नक़द हज़ार उधार से भला है।
جوی می و شیر و شهد و شکر باشد
پر کن قدح باده و بر دستم نه
نقدی ز هزار نسیه خوشتر باشد
जिस हाल में मरेंगे उसी हाल में उठेंगे;
हम शराब और माशूक़ के साथ इसीलिए सदा हैं,
कि क़यामत में हमें वैसा ही जगाएँ।
زآنسان که بمیرند چنان برخیزند
ما با می و معشوقه از آنیم مدام
باشد که به حشرمان چنان انگیزند
और बहत्तर मिल्लतों की चिन्ता ले जाती है;
उस कीमिया से परहेज़ न कर, जिसकी
एक घूँट हज़ार रोग हर लेती है।
و اندیشه هفتاد و دو ملت ببرد
پرهیز مکن ز کیمیایی که از او
یک جرعه خوری هزار علت ببرد
उसे अन्क़ा से भी छिपा रहना चाहिए;
कि सीप में छिपाव से मोती बनता है
वह बूँद जो समुद्र के दिल का राज़ है।
باید که نهفتهتر ز عنقا باشد
کاندر صدف از نهفتگی گردد در
آن قطره که راز دل دریا باشد
और चमन में बैंगनी का सिर झुकता है,
मुझे कली से इनसाफ़ ख़ूब भाता है,
कि वह अपना दामन समेटे रखती है।
بالای بنفشه در چمن خم گیرد
انصاف مرا ز غنچه خوش میآید
کاو دامن خویشتن فراهم گیرد
रहस्यों में कम ही रहा जो मुझ पर न खुला;
बहत्तर साल रात-दिन मैंने सोचा,
मुझ पर यह खुला कि कुछ भी नहीं खुला।
کم ماند ز اسرار که معلوم نشد
هفتاد و دو سال فکر کردم شب و روز
معلومم شد که هیچ معلوم نشد
बाग़ और घर भी तेरे और मेरे बिना रह जाते हैं;
अपना चाँदी-सोना दिरहम से जौ तक
दोस्त के साथ ख़र्च कर, वरना दुश्मन को रह जाएगा।
هم باغ و سرای بی تو و من ماند
سیم و زر خویش از درمی تا به جوی
با دوست بخور گرنه به دشمن ماند
मौत के पाँव तले एक-एक कर नीचे हुए;
हमने उम्र की महफ़िल में एक ही शराब पी,
वे दो-तीन दौर हमसे पहले मस्त हो गए।
در پای اجل یکان یکان پست شدند
خوردیم ز یک شراب در مجلس عمر
دوری دو سه پیشتر ز ما مست شدند
एक घूँट शराब चीन के राज के बराबर है;
ज़मीन के चेहरे पर लाल शराब के सिवा कोई
ऐसी कड़वाहट नहीं जो हज़ार मीठी जानों के बराबर हो।
یک جرعهٔ می مملکت چین ارزد
جز بادهٔ لعل نیست در روی زمین
تلخی که هزار جان شیرین ارزد
मिट्टी का एक ज़र्रा ज़मीन से एक हो गया;
इस जग में तेरा आना-जाना क्या है —
एक मक्खी प्रकट हुई और ओझल हो गई।
یک ذرهٔ خاک با زمین یکتا شد
آمدشدن تو اندر این عالم چیست
آمد مگسی پدید و ناپیدا شد
किसी टूटे कूज़े से एक दम ठंडा पानी,
अपने से कम किसी का मातहत क्यों हो,
या अपने-सा किसी की सेवा क्यों करे।
از کوزه شکستهای دمی آبی سرد
مأمور کم از خودی چرا باید بود
یا خدمت چون خودی چرا باید کرد
और उस हर आज़ाद के हमराज़ और साथी को ला;
चूँकि तू जानता है कि मिट्टी के जग की मुद्दत
हवा है जो जल्दी गुज़रे, शराब ला।
وآن محرم و مونس هر آزاده بیار
چون میدانی که مدت عالم خاک
باد است که زود بگذرد باده بیار
और बेकार सोच से दिल और जान को घायल करे;
ख़ुश जी और जग को प्रसन्नता से गुज़ार,
काम की तदबीर तेरे साथ पहले से नहीं की गई।
وز فکرت بیهوده دل و جان افکار
خرم بزی و جهان به شادی گذران
تدبیر نه با تو کردهاند اول کار
कुछ भी जगह पर नहीं रखते जब तक फिर न छीनें;
अगर आने वाले जान लें कि हम
ज़माने से क्या भुगतते हैं, तो न आएँ।
ننهند به جا تا نربایند دگر
ناآمدگان اگر بدانند که ما
از دهر چه میکشیم نایند دگر
बेकार नहीं है, बेकार के ग़म न खा;
चूँकि जो था बीत गया और अनहुआ अभी प्रकट नहीं,
प्रसन्न रह, हुए और अनहुए का ग़म न खा।
بیهوده نهای غمان بیهوده مخور
چون بوده گذشت و نیست نابوده پدید
خوش باش غم بوده و نابوده مخور
आनन्द का बाग़ हरियाली से सजा माने,
और फिर उस हरियाली पर एक रात ओस-सा
बैठा और सुबह उठ गया — ऐसा ही माने।
باغ طربت به سبزه آراسته گیر
و آنگاه بر آن سبزه شبی چون شبنم
بنشسته و بامداد برخاسته گیر
हर ज़र्रे ने हर ज़र्रे से किनारा लिया;
आह, यह क्या शराब है कि गिनती के दिन तक
बेख़ुद हुए और हर काम से बेख़बर हैं।
هر ذره ز هر ذره گرفتند کنار
آه این چه شراب است که تا روز شمار
بیخود شده و بیخبرند از همه کار
एक जाम है जिसे सबको बारी-बारी चखाते हैं;
जब बारी तेरे दौर में पहुँचे, आह न कर,
प्रसन्नता से शराब पी, कि यह दौर है, ज़ुल्म नहीं।
جامیست که جمله را چشانند بدور
نوبت چو به دور تو رسد آه مکن
می نوش به خوشدلی که دور است نه جور
एक ढेले मिट्टी पर बहुत लात मार रहा था;
और वह मिट्टी हाल की ज़बान में उससे कह रही थी:
मैं भी तुझ-सी थी, मेरे साथ भला बरत।
بر پاره گلی لگد همی زد بسیار
و آن گل بزبان حال با او میگفت
من همچو تو بودهام مرا نیکودار
जवानी के आनन्द की पूँजी है, पी;
आग-सी जलाने वाली, पर ग़म को
ज़िन्दगी के पानी-सी सँवारने वाली है, पी।
سرمایه لذت جوانی است بخور
سوزنده چو آتش است لیکن غم را
سازنده چو آب زندگانی است بخور
या किसी लालेरुख़ हँसती सुन्दरी के साथ पी;
ज़्यादा न पी, बार-बार न कर, फ़ाश न कर,
थोड़ी पी, कभी-कभी पी, और छिपकर पी।
یا با صنمی لاله رخی خندان خور
بسیار مخور ورد مکن فاش مساز
اندک خور و گه گاه خور و پنهان خور
बिल्लौरी साग़र को लाल शराब से भर;
कि यह एक दम की उधार इस फ़ना के कोने में
बहुत ढूँढेगा और फिर नहीं पाएगा।
پر بادهٔ لعل کن بلورین ساغر
کاین یکدم عاریت در این کنج فنا
بسیار بجویی و نیابی دیگر
कौन लौटकर आया कि हमसे राज़ कहे;
सो इस लालच और मुहताजी के दोराहे पर
कुछ न छोड़, कि तू लौटकर नहीं आ रहा।
باز آمده کیست تا به ما گوید راز
پس بر سر این دو راههٔ آز و نیاز
تا هیچ نمانی که نمیآیی باز
नरम-नरम शराब पी और चंग बजा;
कि जो हैं वे बहुत देर नहीं ठहरते,
और जो चले गए, कोई लौटकर नहीं आता।
نرمک نرمک باده خور و چنگ نواز
کانها که بجایند نپایند بسی
و آنها که شدند کس نمیاید باز
मुहब्बत से सौ बोसे उसके माथे पर देती है;
यह ज़माने का कुम्हार ऐसा नाज़ुक जाम
बनाता है और फिर ज़मीन पर पटकता है।
صد بوسه ز مهر بر جبین میزندش
این کوزهگر دهر چنین جام لطیف
میسازد و باز بر زمین میزندش
किसी माहरुख़ के साथ बैठा है तो प्रसन्न रह;
चूँकि जग के काम का अंजाम अनहोनी है,
मान ले कि तू नहीं है, है की तरह प्रसन्न रह।
با ماهرخی اگر نشستی خوش باش
چون عاقبت کار جهان نیستی است
انگار که نیستی چو هستی خوش باش
मैंने दो हज़ार कूज़े देखे, बोलते और चुप;
अचानक एक कूज़े ने हल्ला मचाया:
कहाँ है कूज़ा बनाने वाला, कूज़ा ख़रीदने और बेचने वाला।
دیدم دو هزار کوزه گویا و خموش
ناگاه یکی کوزه برآورد خروش
کو کوزهگر و کوزهخر و کوزه فروش
जो ज़माने के ग़म में उदास बैठे;
शीशे में शराब पी, चंग की तान के साथ,
इससे पहले कि शीशा पत्थर से टकराए।
کو در غم ایام نشیند دلتنگ
می خور تو در آبگینه با ناله چنگ
زان پیش که آبگینه آید بر سنگ
मैंने सारी मुश्किलों को हल कर लिया;
हीले से हर मुश्किल की गाँठ खोल दी,
हर गाँठ खुल गई सिवा मौत की गाँठ के।
کردم همه مشکلات کلی را حل
بگشادم بندهای مشکل به حیل
هر بند گشاده شد به جز بند اجل
शराब का जाम और फूल का दामन हाथ से न रख;
इससे पहले कि अचानक मौत की हवा से
हमारी उम्र का पैरहन फूल के पैरहन-सा हो।
از دست منه جام می و دامن گل
زان پیش که ناگه شود از باد اجل
پیراهن عمر ما چو پیراهن گل
और उम्र के इस एक दम को ग़नीमत गिनें;
कल जब हम इस फ़ना के सराय से गुज़रेंगे,
सात-हज़ार-साल वालों के बराबर होंगे।
وین یک دمِ عمر را غنیمت شمریم
فردا که ازین دیرِ فنا درگذریم
با هفتهزارسالگان سربهسریم
हम इसे ख़याल के फ़ानूस-सा एक मिसाल जानते हैं;
सूरज को चराग़ जान और जग को फ़ानूस,
हम उसमें घूमती तस्वीरों-से हैरान हैं।
فانوس خیال از او مثالی دانیم
خورشید چراغ دان و عالم فانوس
ما چون صوریم کاندر او حیرانیم
इससे पहले कि ज़माने से एक ताप पी लें;
कि यह झगड़ालू चेहरे वाला चरख़ किसी दिन अचानक
इतना वक़्त न देगा कि एक घूँट पानी पी लें।
زان پیش که از زمانه تابی بخوریم
کاین چرخ ستیزه روی ناگه روزی
چندان ندهد زمان که آبی بخوریم
अपने चेहरे का रंग उन्नाब के रंग-सा करूँगा;
इस दख़ल देती अक़्ल के चेहरे पर एक मुट्ठी शराब
ऐसे मारूँगा कि उसे नींद में डाल दूँ।
رنگ رخ خود به رنگ عناب کنم
این عقل فضول پیشه را مشتی می
بر روی زنم چنانکه در خواب کنم
ज़मीन के नीचे छिपे हुओं को देखता हूँ;
जितना अनहोनी के मैदान में नज़र दौड़ाता हूँ,
न-आए हुओं और गए हुओं को देखता हूँ।
در زیرزمین نهفتگان میبینم
چندانکه به صحرای عدم مینگرم
ناآمدگان و رفتگان میبینم
ज़माने में क्या सौ साल क्या एक दिन हों;
कटोरे में शराब डाल, इससे पहले कि हम
कुम्हारों की कार्यशाला में कूज़ा हो जाएँ।
در دهر چه صد ساله چه یکروزه شویم
در ده تو بکاسه می از آن پیش که ما
در کارگه کوزهگران کوزه شویم
तो शराब और माशूक़ के बिना बड़ी ख़ता है;
कब तक क़दीम और हादिस से मेरी उम्मीद और डर,
जब मैं चला गया, जग क्या हादिस क्या क़दीम।
پس بی می و معشوق خطائیست عظیم
تا کی ز قدیم و محدث امیدم و بیم
چون من رفتم جهان چه محدث چه قدیم
और ज़माने के रहस्य नहीं कह सकता;
सोच के समुद्र से अक़्ल ने एक मोती निकाला,
जिसे डर से मैं बेध नहीं सकता।
و اسرار زمانه گفت مینتوانم
از بحر تفکرم برآورد خرد
دری که ز بیم سفت مینتوانم
ईश्वर जानता है कि जो उसने कहा वह मैं नहीं;
पर चूँकि मैं इस ग़म के घोंसले में आया हूँ,
आख़िर कम-से-कम इतना तो जानूँ कि मैं कौन हूँ।
ایزد داند که آنچه او گفت نیم
لیکن چو در این غم آشیان آمدهام
آخر کم از آنکه من بدانم که کیم
इनसाफ़ की पूँजी और ज़ुल्म की नींव हैं;
हम नीच हैं और ऊँचे, कमाल हैं और कमी,
जँग खाया आईना हैं और जमशेद का जाम हैं।
سرمایهٔ دادیم و نهاد ستمیم
پستیم و بلندیم و کمالیم و کمیم
آئینهٔ زنگ خورده و جام جمیم
या रुसवाई और मस्ती के ग़म से नहीं छोड़ता;
मैं शराब प्रसन्न दिल के लिए पीता था,
अब जब तू मेरे दिल में बस गई, नहीं पीता।
یا از غم رسوایی و مستی نخورم
من می ز برای خوشدلی میخوردم
اکنون که تو بر دلم نشستی نخورم
शराब बिना तन का बोझ नहीं उठा सकता;
मैं उस दम का बन्दा हूँ जब साक़ी कहे:
एक जाम और ले — और मैं न ले सकूँ।
بی باده کشید بارتن نتوانم
من بنده آن دمم که ساقی گوید
یک جام دگر بگیر و من نتوانم
नेमत और चाँदी-सोने के साथ आता है कि मैं हूँ;
जब उसका छोटा काम किसी दिन बन जाता है,
अचानक मौत घात से निकलती है कि मैं हूँ।
با نعمت و با سیم و زر آید که منم
چون کارک او نظام گیرد روزی
ناگه اجل از کمین برآید که منم
एक अरसा अपनी उस्तादी पर ख़ुश हुए;
बात का अन्त सुन, कि हमें क्या मिला:
मिट्टी से आए और हवा हो गए।
یک چند به استادی خود شاد شدیم
پایان سخن شنو که ما را چه رسید
از خاک در آمدیم و بر باد شدیم
एक साँस-भर भी अपने अस्तित्व से ख़ुश नहीं;
मैंने ज़माने की शागिर्दी बहुत की,
जग के काम में अब भी उस्ताद नहीं।
یک دمزدن از وجود خود شاد نیم
شاگردی روزگار کردم بسیار
در کار جهان هنوز استاد نیم
आने वाले कल की जो अभी नहीं आया, फ़रियाद न कर;
न-आए और बीते पर बुनियाद न रख,
अभी प्रसन्न रह और उम्र हवा पर न लुटा।
فردا که نیامده ست فریاد مکن
برنامده و گذشته بنیاد مکن
حالی خوش باش و عمر بر باد مکن
और इस फ़ितने और शोर से भरे जग को देख;
शाह और सरदार और बड़े मिट्टी के नीचे हैं,
चाँद-से चेहरे चींटी के मुँह में देख।
وین عالم پر فتنه و پر شور ببین
شاهان و سران و سروران زیر گلند
روهای چو مه در دهن مور ببین
बैठ और एक दम प्रसन्नता से गुज़ार;
अगर जग के स्वभाव में कोई वफ़ा होती,
तेरी बारी औरों से तुझ तक न आती।
بنشین و دمی به شادمانی گذران
در طبع جهان اگر وفایی بودی
نوبت بتو خود نیامدی از دگران
जान निकलने तक ग़म खाने के सिवा कुछ नहीं;
प्रसन्न-दिल वह जो इस जग से जल्दी चला गया,
और सुखी वह जो जग में आया ही नहीं।
جز خوردن غصه نیست تا کندن جان
خرم دل آنکه زین جهان زود برفت
و آسوده کسی که خود نیامد به جهان
हाथ में हवा के सिवा कुछ न होगा;
उसे मेरी मौत पर ख़ुश होना चाहिए
जो मौत के हाथों आज़ाद हो सकता है।
در دست نخواهد به جز از باد بدن
آن را باید به مرگ من شاد بدن
کز دست اجل تواند آزاد بدن
न कुफ़्र, न इस्लाम, न दुनिया, न दीन;
न हक़, न हक़ीक़त, न शरीअत, न यक़ीन —
दोनों जहान में किसमें ऐसा साहस।
نه کفر و نه اسلام و نه دنیا و نه دین
نه حق نه حقیقت نه شریعت نه یقین
اندر دو جهان کرا بود زهره این
इससे भला कि किसी नीच के दस्तरख़ान का टुकड़ा हो;
जौ की अपनी रोटी के साथ, सच में, भला है
इससे कि हर नीच का सना-छना खाना खाए।
به ز آن که طفیل خوان ناکس بودن
با نان جوین خویش حقا که به است
کالوده و پالوده هر خس بودن
एक क़ौम यक़ीन की राह में गुमान में पड़ी है;
मुझे उससे डर है कि किसी दिन आवाज़ आए:
ऐ बेख़बरो, राह न वह है न यह।
قومی به گمان فتاده در راه یقین
میترسم از آن که بانگ آید روزی
کای بیخبران راه نه آنست و نه این
एक और बैल ज़मीन के नीचे छिपा है;
अक़्ल की आँख यक़ीन से खोल,
दो बैलों के बीच एक मुट्ठी गधे देख।
یک گاو دگر نهفته در زیر زمین
چشم خردت باز کن از روی یقین
زیر و زبر دو گاو مشتی خر بین
मैं इस आसमान को बीच से हटा देता;
नए सिरे से एक और आसमान ऐसा बनाता
कि आज़ाद मन की मुराद आसानी से पाता।
برداشتمی من این فلک را ز میان
از نو فلکی دگر چنان ساختمی
کازاده بکام دل رسیدی آسان
नए फ़ैशन वालों से नितरी शराब माँग;
आगे आए हुए एक-एक कर चले गए,
कोई लौटे हुओं का निशान नहीं देता।
می خواه مروق به طراز آمدگان
رفتند یکان یکان فراز آمدگان
کس می ندهد نشان ز بازآمدگان
इससे भला कि किसी ज़ाहिद का ढोंग करना;
अगर आशिक़ और मस्त दोज़ख़ी होंगे,
तो बहिश्त का चेहरा कोई न देखेगा।
به زانکه بزرق زاهدی ورزیدن
گر عاشق و مست دوزخی خواهد بود
پس روی بهشت کس نخواهد دیدن
अपने अच्छे वक़्त को दुख के पत्थर पर घिसना ठीक नहीं;
कोई ग़ैब क्या जाने कि क्या होगा,
शराब चाहिए, माशूक़ चाहिए, और मन-भर आराम।
وقت خوش خود بسنگ محنت سودن
کس غیب چه داند که چه خواهد بودن
می باید و معشوق و به کام آسودن
जिसके दर पर शाह चेहरा रखते थे,
हमने उसके कँगूरे पर एक फ़ाख़्ता देखी,
बैठी कह रही थी: कू-कू, कू-कू।
بر درگه آن شهان نهادندی رو
دیدیم که بر کنگرهاش فاختهای
بنشسته همی گفت که کوکوکوکو
और हमारी उम्र की आस के तार का बाना कहाँ;
जग की इतनी नाज़ुक जानों के सिर और पैर
जलते हैं और मिट्टी होते हैं — धुआँ कहाँ।
وز تار امید عمر ما پودی کو
چندین سروپای نازنینان جهان
میسوزد و خاک میشود دودی کو
मेरे और तेरे गड्ढे पर दो ईंटें रखेंगे;
और फिर औरों की क़ब्र की ईंट के लिए
किसी साँचे में मेरी और तेरी मिट्टी ढालेंगे।
خشتی دو نهند بر مغاک من و تو
و آنگاه برای خشت گور دگران
در کالبدی کشند خاک من و تو
मेरी और तेरी पाक जान पर घात लगाए है;
हरियाली पर बैठ और उजली शराब पी,
कि यह हरियाली मेरी और तेरी मिट्टी से बहुत उगेगी।
قصدی دارد بجان پاک من و تو
در سبزه نشین و می روشن میخور
کاین سبزه بسی دمد ز خاک من و تو
शराब भी ख़ेमेवाली सुन्दरियों की हथेली से भली;
मस्ती और क़लन्दरी और भटकाव भला,
एक घूँट शराब चाँद से मछली तक भली।
می هم ز کف بتان خرگاهی به
مستی و قلندری و گمراهی به
یک جرعه می ز ماه تا ماهی به
बुलबुल फूल के रूप से उमंग में हुई;
फूल की छाँव में बैठ, कि यह फूल बहुत
मिट्टी में झर जाएगा और हम मिट्टी होंगे।
بلبل ز جمال گل طربناک شده
در سایه گل نشین که بسیار این گل
در خاک فرو ریزد و ما خاک شده
और यह उम्र प्रसन्नता से गुज़ारूँ या नहीं;
शराब का क़दह भर, कि मुझे मालूम नहीं
यह दम जो भीतर लूँ, बाहर लूँगा या नहीं।
وین عمر به خوشدلی گذارم یا نه
پرکن قدح باده که معلومم نیست
کاین دم که فرو برم برآرم یا نه
उसकी तलाश में मेहनत करे तो माफ़ी है;
बाक़ी सब मुफ़्त भी क़ीमत नहीं रखता, सावधान,
कि बेशक़ीमती उम्र उसके बदले न बेच।
معذوری اگر در طلبش میکوشی
باقی همه رایگان نیرزد هشدار
تا عمر گرانبها بدان نفروشی
हमारी हस्ती के पन्ने लपेटे जाते हैं;
शराब पी! ग़म न खा, कि हकीम ने फ़रमाया:
जग के ग़म ज़हर-से हैं और उसका तिर्याक़ शराब।
اوراق وجود ما همی گردد طی
می خور! مخور اندوه که فرمود حکیم
غمهای جهان چو زهر و تریاقش می
वह कूज़ा हर तरह के राज़ की बात कहने लगा:
मैं एक शाह था जिसका सुनहरा जाम था,
अब हर ख़ुमारी का कूज़ा हो गया हूँ।
آن کوزه سخن گفت ز هر اسراری
شاهی بودم که جام زرینم بود
اکنون شدهام کوزه هر خماری
और सात और चार से सदा तपिश में है,
शराब पी, कि मैंने तुझसे हज़ार बार कहा:
तेरा लौटना नहीं, जब गया तो गया।
وز هفت و چهار دایم اندر تفتی
می خور که هزار بار بیشت گفتم
باز آمدنت نیست چو رفتی رفتی
चतुर ज्ञानियों की बारीकी तक न पहुँचेगा;
यहाँ लाल शराब से बहिश्त बना ले,
कि वहाँ जो बहिश्त है, पहुँचे या न पहुँचे।
در نکته زیرکان دانا نرسی
اینجا به می لعل بهشتی می ساز
کانجا که بهشت است رسی یا نرسی
लाल शराब के साथ रह और किसी चाँदी-तन के संग;
कि जिसने जग बनाया, वह बेफ़िक्र है
तुझ-सी मूँछ और मुझ-सी दाढ़ी से।
با باده لعل باش و با سیم تنی
کانکس که جهان کرد فراغت دارد
از سبلت چون تویی و ریش چو منی
या इस लम्बी राह का कोई पहुँचना होता;
काश सौ हज़ार साल बाद मिट्टी के दिल से
हरियाली-सी आशा उगने की उम्मीद होती।
یا این ره دور را رسیدن بودی
کاش از پی صد هزار سال از دل خاک
چون سبزه امید بر دمیدن بودی
मैं मस्त था जो यह अय्याशी की;
सुराही मुझसे हाल की ज़बान में कह रही थी:
मैं तुझ-सी थी, तू भी मुझ-सी होगा।
سرمست بدم که کردم این عیاشی
با من به زبان حال میگفت سبو
من چون تو بدم تو نیز چون من باشی
अपने ही धागे का एक सिरा पाता;
कब तक अस्तित्व के तंग क़ैदख़ाने से —
काश अनहोनी की ओर एक दर पाता।
هم رشته خویش را سری یافتمی
تا چند ز تنگنای زندان وجود
ای کاش سوی عدم دری یافتمی
खेत और नदी के किनारे बेफ़िक्र बैठ;
कितने ही अज़ीज़ों को इस बुरे स्वभाव के चरख़ ने
सौ बार प्याला और सौ बार सुराही बनाया।
فارغ بنشین بکشتزار و لب جوی
بس شخص عزیز را که چرخ بدخوی
صد بار پیاله کرد و صد بار سبوی
मैंने कहा गए हुओं की कोई ख़बर न दोगे;
उसने कहा शराब पी, कि हम-से बहुत
गए और कोई ख़बर लौटकर न आई।
گفتم نکنی ز رفتگان اخباری
گفتا می خور که همچو ما بسیاری
رفتند و خبر باز نیامد باری
मुश्किल क्या एक क्या सौ हज़ार, ऐ साक़ी;
हम सब मिट्टी हैं, चंग सँवार, ऐ साक़ी,
हम सब हवा हैं, शराब ला, ऐ साक़ी।
مشکل چه یکی چه صد هزار ای ساقی
خاکیم همه چنگ بساز ای ساقی
بادیم همه باده بیار ای ساقی
बाग़ में कौसर की एक नदी बह रही है;
मैदान बहिश्त-सा है, कौसर की कम बात कर,
बहिश्त में किसी बहिश्ती चेहरे के संग बैठ।
در باغ روان است ز کوثر جویی
صحرا چو بهشت است ز کوثر کم گوی
بنشین به بهشت با بهشتی رویی
कल तेरी चाह से बेफ़िक्र हो गए;
क्या कहानी कहूँ, कि कल तेरी माँग पर
कल ही तेरे कल के काम का फ़ैसला दे दिया।
فارغ شدهاند از تمنای تو دی
قصه چه کنم که به تقاضای تو دی
دادند قرار کار فردای تو دی
चरख़ के पाये पर उस्ताद को खड़ा देखा;
वह बेधड़क कूज़े को दस्ता और सिर बना रहा था
शाह की खोपड़ी से और भिखारी के हाथ से।
در پایه چرخ دیدم استاد بپای
میکرد دلیر کوزه را دسته و سر
از کله پادشاه و از دست گدای
जो हुक्म क़ज़ा से हुआ, उसे तू मुझसे जानता है;
अपनी गर्दिश में अगर मेरा बस चलता,
मैं ख़ुद को इस घबराहट से छुड़ा लेता।
حکمی که قضا بود ز من میدانی
در گردش خویش اگر مرا دست بدی
خود را برهاندمی ز سرگردانی
एक क़दह भर, पी और मुझे एक और दे;
इससे पहले, ऐ सनम, कि किसी रस्ते पर
मेरी और तेरी मिट्टी को कुम्हार कूज़ा बना दे।
پر کن قدحی بخور بمن ده دگری
زان پیشتر ای صنم که در رهگذری
خاک من و تو کوزهکند کوزهگری
और जाना भी मेरे बस में होता, तो कब जाता;
इससे भला न होता कि इस उजड़े सराय में
न आता, न जाता, न होता।
ور نیز شدن بمن بدی کی شدمی
به زان نبدی که اندر این دیر خراب
نه آمدمی نه شدمی نه بدمی
और दो-मन शराब, किसी भेड़ की एक रान,
किसी लालेरुख़ के साथ और बाग़ के एक कोने में,
वह ऐश हो जो हर सुलतान की हद में नहीं।
وز می دو منی ز گوسفندی رانی
با لاله رخی و گوشه بستانی
عیشی بود آن نه حد هر سلطانی
चरख़ का सारा हाल पसन्दीदा होता;
और अगर चरख़ के कामों में इनसाफ़ होता,
गुणी लोगों का दिल कब दुखता।
احوال فلک جمله پسندیده بدی
ور عدل بدی بکارها در گردون
کی خاطر اهل فضل رنجیده بدی